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पुनरुद्धार से पांवधोई नदी अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त करेगी, इसके तल का क्षेत्रफल बढ़ेगा तथा जल की मात्रा में वृद्धि होगी

    नदी के प्रथम भाग उद्गम स्थल शंकलापुरी मन्दिर से बाबा लालदास के बाड़े तक लगभग 04 कि0मी0 लम्बाई में स्वच्छ व निर्मल जल प्रवाहित होता है, परन्तु लम्बे समय से सफाई न होने के कारण नदी का आन्तरिक भाग अत्यधिक संकरा हो गया है। इन सभी समस्याओं के मद्देनजर पांवधोई नदी के पुनरुद्धार का निर्णय लिया गया है। इससे पांवधोई नदी को पुनर्जीवन प्राप्त होगा।
     शाह्जाहंपुर !राज्य सरकार ने व्यापक जनहित में तथा स्थानीय जनता व जनप्रतिनिधियों की मांग के दृष्टिगत जनपद सहारनपुर में पांवधोई नदी का पुनरुद्धार किए जाने का निर्णय लिया है। इसके तहत पांवधोई नदी के चैनेलाइजेशन एवं पुनरुद्धार का कार्य नदी के वर्तमान में बहाव व जल की स्वच्छता के मद्देनजर 02 भागों में किया जाएगा। इससे नदी अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त करेगी और नदी के तल का क्षेत्रफल बढ़ेगा, जिससे नदी में जल की मात्रा में वृद्धि होगी। प्रथम चरण में नदी के शुद्ध जल को उद्गम स्थल से धार्मिक महत्व के बाबा लालदास का बाड़ा तक लाए जाने हेतु प्रयास प्रारम्भ कर दिए गए हैं।
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     यह जानकारी आज यहां देते हुए राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि सहारनपुर षहर उत्तर प्रदेष का एक ऐतिहासिक एवं औद्योगिक षहर है। इस षहर के माध्यम से होकर पांवधोई नदी बहती है। इस नदी का उद्गम स्थल षहर की उत्तर दिषा में ग्राम षंकलापुरी एवं मंषापुर के पास है। यह नदी षहर की सीमा में ही ढमोला नदी में गिरती हैै, जो अन्ततः जनपद की सीमा के अन्दर ही हिण्डन नदी में मिल जाती है। यह नदी भू-गर्भ जल से स्वतः ही रीचार्ज होती है।
   प्रवक्ता ने बताया कि पांवधोई नदी की कुल लम्बाई 07 किमी0 है एवं परिकल्पित डिस्चार्ज 2900 क्यूसेक्स है। नदी के उद्गम स्थ्ल पर पेरेनियल प्राकृतिक स्रोत उपलब्ध होने के कारण वर्ष भर इसमें पानी उपलब्ध रहता है, जिसकी न्यूनतम मात्रा 20 क्यूसेक्स है। प्राचीनकाल से ही इस नदी का षहरवासियों के लिए धार्मिक महत्व रहा है तथा नदी में स्नान करना एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस नदी के किनारे कई मन्दिर बने हुए हैं तथा नये भव्य मन्दिरों का निर्माण भी हो रहा है। इनमें बाबा लालदास का बाड़ा एक महत्वपूर्ण मठ है।
      समय के साथ-साथ पांवधोई नदी के समीप षहर की आबादी बढ़ती गयी तथा नदी के दोनों ओर बस्तियों का निर्माण होने से नदी का बहाव क्षेत्र सीमित होता गया। स्थानीय कालोनियों के पानी के निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण प्रदूषित जल व अन्य गन्दगी इस नदी में जाती है। इससे षहरी क्षेत्र में नदी प्रभावित हुई है। 
       ज्ञातव्य है कि वर्ष 2013 में जनपद अब तक की सर्वाधिक भयंकर बाढ़ से ग्रस्त हुआ था। उस समय पांवधोई नदी में भी अब तक का सर्वाधिक 10,000 क्यूसेक जल प्रभावित हुआ था, जिससे नदी के बहाव मार्ग में अवरोध होने के कारण रिहायशी इलाकों में जल भराव होने से जन-धन की हानि हुई थी।
    

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