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यूपी इन्वेस्टर्स समिट-2018 : बदलेगी यूपी की छटा4.28 लाख करोड़ के एमओयू हुए साइन

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इन्वेस्टर्स समिट-2018 को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में देख रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह महज संयोग है कि प्रदेश सरकार ने 4 लाख 28 हजार करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की है और इतनी ही रकम यानी 4.28 लाख करोड़ रुपये के 1045 एमओयू पर हमने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें 500 कंपनियां शामिल हैं। 

   up investors summit-2012: change will be replaced by mo.u. of 4.28 lakh crore rupees यूपी इन्वेस्टर्स समिट-2018 : बदलेगी यूपी की छटा4.28 लाख करोड़ के एमओयू हुए साइन uhhh 300x168 औद्योगिक विकास के लिए पूर्वांचल और बुन्देलखण्ड कॉरिडोर बनाने की घोषणा की जा चुकी है। इन्हें देश के ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। प्रदेश में विभिन्न शहरों को आपस में जोड़ने के लिए रीजनल कनेक्टिविटी शुरू की गई है। इसके चलते पयर्टन, कृषि निर्यात और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। जेवर अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट की स्थापना भी जाएगी। पॉवर फॉर ऑल के लिए केन्द्र सरकार के साथ करार किया जा चुका है। केन्द्र सरकार की सौभाग्य
योजना के तहत 2019 तक डेढ़ करोड़ घरों में नि:शुल्क बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। 

उन्होंने कहा कि प्रत्येक एमओयू के क्रियान्वयन का काम वे खुद अपनी निगरानी में रखेंगे। इन एमओयू की वे लगातार समीक्षा करेंगे ताकि निवेशकों को कहीं कोई असुविधा न हो। प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया के विजन को साकार करने के लिए यूपी को आगे बढ़ाएंगे।

तीन साल में 40 लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार तीन साल में 40 लाख रोजगार देगी। उनकी नई औद्योगिक नीति पूरी तरह रोजगारपरक है। उन्होंने देश के जाने-माने उद्योगपतियों को साथ लेकर राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड का गठन किया है। बिजनेस रिफार्म एक्शन के लिए उनके 20 विभाग लगे हुए हैं। उद्योगों का अनुमोदन, स्वीकृति और अन्य प्रक्रियाओं का त्वरित निस्तारण एक छत के नीचे हो, इसके लिए डिजिटल क्लियरेंस सिस्टम स्थापित किया गया है। इसकी
निगरानी उनका सीएम कार्यालय करेगा। 

बुधवार को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में दो दिवसीय इन्वेस्टर्स समिट-2018 के शुभारंभ के मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को बार-बार कहते हैं कि विकास का कोई विकल्प नहीं हो सकता। विकास के लिए सुशासन की जरूरत है। अगर हमें भारत को महाशक्ति के रूप में विश्वपटल पर लाना है तो वह मार्ग उत्तर प्रदेश से जाता है।

यूपी को पिछड़े और बीमारू राज्य की श्रेणी से उबारना लक्ष्य

योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में यूपी को पिछड़े और बीमारू राज्य की श्रेणी से उबार कर देश के समृद्ध राज्य की श्रेणी में खड़ा करने का लक्ष्य लेकर उनकी सरकार ने प्रयास शुरू किए हैं। उत्तर प्रदेश इन्वेस्टर्स समिट उसकी एक कड़ी है। इस समिट में जो फोकस सेक्टर तय किए हैं, उनमें  एग्रो, फूड प्रोसोसिंग, डेरी, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चर, आईटी, टूरिज्म, सिविल एविएशन लघु एवं मध्यम उद्योग, हैण्डलूम, फिल्म और ग्लोबल एनर्जी आदि शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र के बाद इन सब विषयों को लेकर जो सत्र होने जा रहे हैं,उनमें सबकी भागीदारी से प्रदेश में विकास की संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। इसकी प्रदेश की जनता बहुत दिनों से प्रतीक्षा कर रही है। किसी भी राज्य को विकसित करने के लिए सुदृढ़ कानून- व्यवस्था, गुणवत्ता युक्त इन्फ्रास्ट्रक्चर, बिजली की अनवरत आपूर्ति, सड़कें, परिवहन, सिंचाई की बेहतर व्यवस्था, उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए स्वस्थ व शिक्षित मानव संसाधन, स्मार्ट प्रशासनिक व्यवस्था बुनियादी आवश्यकताएं हैं। इसके साथ ही सरकार की नीतियों को जमीन पर लाने के लिए पारदर्शी और जागरूक व्यवस्था भी जरूरी है। 

पिछले 11 महीनों में हमारी सरकार ने कानून का राज्य स्थापित करने में जरूरी प्रभावी कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जिन 99 शहरों की घोषणा की है, उनमें 10 शहर उत्तर प्रदेश के हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के शहरों में मेट्रो का जिक्र करते हुए कहा कि लखनऊ में मेट्रो का संचालन शुरू हो चुका है। कानपुर, मेरठ और आगरा में मेट्रो संचालन की डीपीआर को केन्द्र ने मंजूरी दे दी है। वाराणसी, गोरखपुर, इलाहाबाद और झांसी में संशोधित
डीपीआर तैयार की जा रही है। 

स्टार्टअप पॉलिसी को आगे बढ़ाया जाएगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार प्रदेश में ऐसा औद्योगिक माहौल बनाना चाहती है, जिसमें नए और पारंपरिक उद्यम एक साथ विकसित हो सकें और एक-दूसरे के सहायक बनें।  वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत विभिन्न जिलों के पारम्परिक उत्पाद को बढ़ावा देने का काम शुरू हो चुका है। इसमें अधिक से अधिक रोजगार सृजन हो सके, इसके लिए नए उद्यमियों को सहायता देने के लिए केन्द्र सरकार की तर्ज पर स्टार्टअप पॉलिसी को आगे बढ़ाया जाएगा। नए उद्यमियों के को इनोवेशन में मदद करने के लिए कानपुर के आईआईटी, बीएचयू और प्रदेश के 30 संस्थानों को लगाया गया है। 

 

        मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में युवा शक्ति का प्रचुर भंडार है। 30 साल से कम युवक 60 फीसदी हैं। प्रदेश के आईटीआई को कौशल विकास से जोड़कर उद्योगों को दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में ग्रीन ऊर्जा, जैव ऊर्जा, बायोगैस, बायोडीजल के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संभावनाएं हैं। पयर्टन नीति को रोजगारपरक बनाया जा रहा है। पयर्टन में भी निवेश की भारी संभावनाएं हैं। 

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