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यूपी के सीएम होंगे योगी आदित्यनाथ: पूर्वांचल 15 साल बाद बना प्रदेश का पावर सेंटर

      लखनऊ। (अरुण कुमार सिंह ) देश को नरेंद्र मोदी के रूप में प्रधानमंत्री देने के बाद पूर्वांचल 15 साल बाद यूपी का भी पावर सेंटर बनने जा रहा है। 8 मार्च 2002 को प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद से राजनाथ सिंह की विदाई के बाद पूर्वांचल में गोरखपुर को कर्मभूमि बनाए योगी आदित्यनाथ 19 मार्च 2017 को मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने जा रहे हैं। गोरखनाथ मंदिर के महंत योगी आदित्यनाथ इस समय पांचवीं बार गोरखपुर से संसद सदस्य है।

        सूबे के वि धानसभा चुनाव में कमल खिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मुख्यमंत्री पद की तलाश आखिरकार शनिवार को समाप्त हो गयी। सीएम के कार्यालय लोकभवन में आयोजित नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं सांसद योगी आदित्यनाथ को विधायक दल का नेता चुना गया। बैठक में केन्द्रीय पर्यवेक्षक के रूप में वेंकैया नायडू और भूपेन्द्र यादव मौजूद रहे।

आदित्यनाथ पहली बार मुख्यमंत्री बनेंगे। लंबा राजनैतिक अनुभव और प्रदेश में अच्छी पकड़ के लिए योगी जाने जाते हैं। भारी बहुमत से जीतने के बाद यूपी में विकास के एजेंडे पर सरकार चलेगी। जिसकी सारी जिम्मेदारी योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई है। 19  मार्च को योगी सीएम पद की शपथ लेंगे। शपथ समारोह में पीएम मोदी सहित कई दिग्गज नेता शामिल होंगे।

26 साल की उम्र में बने थे पहली बार सांसद
योगी के मुख्यमंत्री बनने के ऐलान के साथ ही साफ हो गया कि अब प्रदेश के विकास का सूरज जहां पूर्वांचल से उदय होगा, वहीं विकास की दौड़ में पिछड़ने वाले पूर्वांचल के दिन भी बहुरेंगे। योगी आदित्यनाथ का जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखण्ड में हुआ था, तब उत्तराखण्ड अविभाजित उत्तर प्रदेश का हिस्सा था। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से पांच बार सांसद रह चुके हैं। वह सबसे पहले 26 साल की उम्र में 1998 में लोकसभा सांसद बने थे। अब तक योगी आदित्यनाथ 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में सांसद चुने जाते आये हैं।

अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी के तौर पर बने महन्त
साल 2014 में गोरखनाथ मंदिर के महन्त अवैद्यनाथ के स्वर्गवास के बाद वह महन्त यानी गोरक्ष पीठाधीश्वर चुन लिए गए। गोरखनाथ मन्दिर के महन्त अवैद्यनाथ ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। इसके अलावा योगी आदित्यनाथ हिन्दू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं। योगी आदित्यनाथ गढ़वाल विश्वविद्यालय से गणित में बीएससी की डिग्री हासिल कर चुके हैं। उनका पुराना नाम अजय सिंह है। वहीं सन्यासी होने के बाद उन्हें योगी आदित्यनाथ नाम दिया गया।

चुनाव के दौरान ही उठी थी सीएम बनाने की मांग
विधानसभा चुनाव में वह भाजपा के स्टार प्रचारक थे। चुनाव के दौरान ही योगी को सीएम बनाने की मांग उठने लगी थी, लेकिन खुद योगी सीएम के सवाल पर कुछ कहने से बचते रहे। उन्होंने विधायक दल की बैठक में ही मुख्यमंत्री का चयन होने की बात कही। हालांकि उनके चाहने वाले उन्हें सीएम के पद पर देखना चाहते थे। इसके लिए पूर्वांचल में कई जगह यज्ञ-हवन होते रहें। वहीं अब योगी आदित्यनाथ के शुभचिन्तकों की मुराद पूरी हुई है।

      हिंदुत्ववादी संगठन ‘हिंदू युवा वाहिनी’ की संस्थापना करने वाले योगी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलने के पीछे विधानसभा चुनाव में बीजेपी को रेकॉर्ड सीट मिलने का भी अहम रोल रहा है। पूर्वांचल में गिने जाने वाले 25 जिलों में से 11 जिलों की सभी विधानसभा सीटों पर बीजेपी को जीत मिली है। पूर्वांचल की 141 सीटों में से 111 सीट बीजेपी को मिली थी, वहीं एसपी को 14 व बीएसपी को 12 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। कुशीनगर की एक सीट छोड़ दें तो पूर्वांचल में कांग्रेस का लगभग सफाया हो चुका है।

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