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थू है ऐसी कौम पर…..!!!!!!!

       विभाजन के बाद सन 1947 को पाकिस्तान में हिंदुओं की हत्याओं, लड़कियों से बलात्कार का नंगा नाच हो रहा था। लाहौर से हर ट्रेन में लाशों के ढेर और उन पर मंडराते कुत्ते, गिद्ध दिखाई दे रहे थे। नेहरू जी ने रेडियो पर शरणार्थी शिविरों में रह रहे हिंदुओं से धैर्य और शांति बनाये रखने की अपील की।

       [object object] थू है ऐसी कौम पर…..!!!!!!! 21740054 2009001925780456 3808065956711445780 n 1दूसरे दिन वो शिविरों में इंदिराजी के साथ देखने गए। वहां नेहरू जी तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश में एक 80 वर्षीय वृद्ध द्वारा इंदिरा का स्पर्श हो गया। ये देख नेहरू ने तुरंत ही उस वृद्ध को तमाचा जड़ दिया। वो वृद्ध लाहौर का एक प्रसिद्ध व्यापारी था जिस पर वक़्त की मार पड़ रही थी।  तमाचा खा कर वो जोर से हंसा और बोला, “इंदिरा मेरी पोती के समान है क्योंकि आप खुद मेरे बेटे की उम्र के हैं। मेरा हाथ लग जाने भर से आप क्रोधित हो गए और मेरी 3 जवान पोतियों को मुसलमान मेरे सामने उठा ले गए फिर भी आप कहते हैं सब भुला दूं।”* नेहरूजी ये सुनकर वहां से इंदिरा को साथ लेकर तुरंत निकल गए।

-अश्व घोष की पुस्तक *”द कुरान एंड द काफिर”* के अंश

   लाहौर से एक तस्वीर खूब वायरल हुयी थी जिसमें एक बुजुर्ग सिख रमजान में तड़के ढोल बजा कर लोगों को नमाज के लिए उठा रहे हैं.

       इधर काश्मीर के त्राल में एक सिख छात्रा की आपबीती हिला कर रख देने वाली है.
मुस्लिम यूनिवर्सिटी में इंजिनियरिंग की पढाई कर रही यह अकेली सिख छात्रा है.
इसे लगातार क्लास में छात्रों द्वारा परेशान किया जाता रहा.  कहा गया कि तुम्हारे यहाँ रहने से हम नापाक हो जाते हैं….. तुम्हारे धर्म से हमें नफरत है…..
उसे रोजा रखने और हिजाब पहनने के लिए भी प्रताड़ित किया गया . 
एक दो बार उन्मादित छात्रों ने इस्लाम कबूल करने के लिए धमकी देते हुए हमला कर दिया
उसका गला दबाया.  इस दौरान सारे स्टूडेंट्स तमाशा देखते रहे . कोई हस्तक्षेप करने तक नहीं आया . अध्यापक की कौन कहे   वीसी तक सिख परिवार ने गुहार लगाई.  पर कोई एक्शन नहीं लिया गया . 
वह अकेली सिख छात्रा इन मजहबी नफरतों को सहते हुए पढाई जारी रखे हुए थी . आये दिन उसे कॉलेज के बाहर और अंदर घेर कर मजहबी किड़े उसे भद्दी भद्दी गालियाँ देते . 
और अंततः उसे उन्ही नफरती शांतिदूतों द्वारा धारदार हथियार से हमला किया गया. 
छात्रा गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती है . 
कहानी यहीं खत्म नहीं होती. 
जब सिख परिवार शिकायत लेकर स्थानीय  थाने पहुंचा तो एफआईआर नहीं लिखी गयी,  उसे डांटा गया और इल्जाम लगाया गया कि तुम साम्प्रदायिक नफरत फैलाना चाहते हो . बड़ी मुश्किल से शिकायत दर्ज तो हुई पर जाहिर है कि कार्यवाही होनी नहीं थी . 
   काश्मीर और वहाँ की आवाम दुनिया की सबसे एहसान फरामोश समुदाय है. मजहबी नफरत और जेहाद से भरी हुई कौम जो एक अदद गैर मजहबी छात्रा को भी बर्दाश्त नहीं कर सकती. 
थू है ऐसी कौम पर

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