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समूचा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसके साथ छेड़छाड़ मंजूर नहीं है-भारत

   पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, बेशक इसका काफी हिस्सा अभी पाकिस्तान के कब्जे में है। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के जिस हिस्से पर अवैध तरीके से कब्जा कर रखा है, उसमें गिलगित-बाल्टिस्तान भी है। उसने इन इलाकों को अपने पांचवें प्रांत के तौर पर शामिल करने की कोशिश की है, इसलिए भारत की ओर से सख्त विरोध तो होना ही था। पाकिस्तान का यह कदम पूरी तरह से अवैध और गैरकानूनी है। भारत ने सीपीईसी का विरोध भी इसी कारण किया है कि यह जम्मू-कश्मीर के हिस्से से होकर गुजर रहा है। लेकिन विरोध के साथ भारत को पाकिस्तान पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने के उपाय भी करने होंगे।

   रणनीतिक दृष्टि से अहम

   हिंदू राजाओं के काल में यह सर्गिन नाम से प्रसिद्ध था। बाद में गलियित और सिख शासन के दौरान इसका नाम गिलगित पड़ा। गिलगित-बाल्टिस्तान रणनीतिक दृष्टि से अंग्रेजों के लिए अहम थे। पेशावर की तरह गिलगित का भूगोल भी उन्हें रास आता था। कारण, यह मध्य एशिया को भारत से जोड़ता था, जहां चीन, रूस व ब्रिटिश साम्राज्यों की सीमाएं मिलती थीं। रूस और चीन को लेकर ब्रिटेन की अपनी आशंकाएं थीं।इसी कारण जम्मू-कश्मीर को बेचते समय उन्होंने शर्त रखी कि इलाके की सरहदों पर कोई मोर्चा खुला तो डोगरा राजा की सेनाएं उसकी ओर से लड़ेंगी। 

   गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवें राज्य के तौर पर मान्यता देने की पाकिस्तान की कुटिल चाल पर भारत ने साफ कहा है कि समूचा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसके साथ छेड़छाड़ मंजूर नहीं है

      पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के हिस्से को लेकर हमारी नीतियों में एक अजीब तरह की उदासीनता रही थी। इसी का नतीजा है कि पाकिस्तान अब गिलगित और बाल्टिस्तान को अपने पांचवें राज्य के तौर पर मान्यता देने की तैयारी कर रहा है। हाल ही में पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान के स्वरूप को बदलने का प्रयास किया है। पाकिस्तानी हुकूमत ने हालिया आदेश के जरिये गिलगित-बाल्टिस्तान में स्थानीय परिषदों के ज्यादातर अधिकार ले लिए हैं। इसे इन इलाकों पर पूरी तरह कब्जा करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

[object object] समूचा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसके साथ छेड़छाड़ मंजूर नहीं है-भारत Capture                                           300x162गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवें प्रांत के तौर पर मान्यता देने की पाकिस्तान की कोशिशों के विरूद्ध प्रदर्शन करते गिलगित-वासी

      भारत ने पाकिस्तान की इस कारगुजारी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान के उप-उच्चायुक्त सैयद हैदर शाह को बुलाकर स्पष्ट कहा कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान को गिलगित-बाल्टिस्तान समेत अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर के किसी भी हिस्से की स्थिति से छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं है। हालांकि इसके बाद पाकिस्तान ने भी भारत के उप-उच्चायुक्त को बुलाकर विरोध जताया। पाकिस्तान के इस कदम का गिलगित-बाल्टिस्तान में भी जबरदस्त विरोध हो रहा है।

     लोगों को यह बात समझ में आ गई है कि पाकिस्तान सरकार केवल उनका इस्तेमाल कर रही है। वहां बाहरी लोगों को बसाया गया, जिससे स्थानीय लोग अपने ही घर में बेगाने हो गए हैं। दरअसल, जुल्फिकार अली भुट्टो ने कानून में बदलाव करके गिलगित-बाल्टिस्तान को बाहरी लोगों के लिए खोल दिया था जिसके कारण 1998 से 2011के बीच यहां की आबादी 63 प्रतिशत बढ़ गई। वहीं मीरपुर, मुजफ्फराबाद और रावलकोट में आज भी बाहरी लोग नहीं बस सकते। इस वजह से इनकी आबादी केवल 22 प्रतिशत ही बढ़ी। इसके अलावा मानवाधिकारों का भी जमकर हनन हो रहा है। तभी वहां आएदिन सरकार विरोधी प्रदर्शन होते रहते हैं।

चीन की छटपटाहट

     चीन ने इस मसले पर प्रत्यक्षत: चुप्पी साध रखी है। उसने केवल इतना कहा कि सीपीईसी के जम्मू-कश्मीर के विवादित क्षेत्र से गुजरने से जम्मू-कश्मीर के प्रति देश के नजरिये में कोई अंतर नहीं आएगा। उसका मानना है कि दोनों देशों को बातचीत से इसका हल खोजना चाहिए। लेकिन चीन का दूसरा पक्ष यह है कि भारत में सत्ता परिवर्तन के बाद वह फूंक-फूंककर कदम रखना चाहता है। वह नहीं चाहता कि भारत कोई अड़ंगा खड़ा करे। वैसे भी, मौजूदा भाजपा सरकार ने न केवल सीपीईसी में शामिल होने से स्पष्ट इनकार किया, बल्कि यह बताने में भी संकोच नहीं किया कि ऐसा वह इसलिए कर रहा है क्योंकि यह जम्मू-कश्मीर से होकर गुजर रहा है। चीन की इन्हीं अपेक्षाओं और आशंकाओं के कारण पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान की स्थिति बदलने की कोशिश की है।

     पूर्ववर्ती भारतीय सरकारों के साथ दिक्कत यह रही कि वे 1962 के दु:स्वप्न से उबर नहीं सकीं। चीन को भी इसकी आदत पड़ गई थी जिसके कारण सीपीईसी का मार्ग तय करते समय उसने यह चिंता नहीं की कि रास्ते में जम्मू-कश्मीर का विवादित इलाका आ रहा है। उसे नहीं लगता था कि भारत अब कभी उसके सामने सिर उठाकर खड़ा हो सकता है, पर डोकलाम प्रकरण ने उसे पसोपेश में डाल दिया है।

हमने क्या खोया

     महाराजा हरि सिंह ने 1948 में जब जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय किया था, तब उनकी रियासत का क्षेत्रफल 2,22,236 वर्ग किमी था, जिसमें मीरपुर, मुजफ्फराबाद और रावलकोट (जिसे पाकिस्तान आजाद कश्मीर कहता है) समेत गिलगित-बाल्टिस्तान भी थे। इसका आधे से अधिक हिस्सा पाकिस्तान-चीन के पास है। हमारे पास केवल 1,01,000 वर्ग किमी हिस्सा है। पाकिस्तान के कब्जे में 78,114 वर्ग किमी और चीन के कब्जे में 42,735 वर्ग किमी क्षेत्र है। पाकिस्तानी कब्जे में गिलगित-बाल्टिस्तान का 85प्रतिशत से भी अधिक क्षेत्र है। ये इलाके प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हैं। पाकिस्तान को 90 प्रतिशत से अधिक पेयजल इन्हीं इलाकों से मिलता है। यहां सोने का बड़ा भंडार होने का अनुमान है, क्योंकि यहां पानी में रेत के साथ सोने के कण बहकर आते हैं। पाकिस्तान के हाथ पड़ने से पहले तक गिलगित सोने के कणों में ही कर का भुगतान करता था।

 
     पाकिस्तान व चीन ने जम्मू-कश्मीर के इलाकों की जो बंदरबांट की है, उसके पीछे पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों की गलत नीतियां काफी हद तक जिम्मेदार हैं। उन्होंने कभी अपने इस हिस्से की सुध लेने की सियासी कोशिश नहीं की जिसकी उम्मीदें स्वाभाविक रूप से हमसे थीं। इतना तय है कि हमें पाकिस्तान के मामले में आक्रामक कूटनीति का सहारा लेना पड़ेगा जिसमें निरंतरता हो। तभी शायद अपेक्षित परिणाम निकल सकेगा। 
 

जम्मू-कश्मीर का हिस्सा

     16 मार्च, 1846 तक गिलगित-बाल्टिस्तान पंजाब का हिस्सा था। 1845 में अंग्रेजों और सिखों के बीच पहला युद्ध हुआ। सिखों ने अंग्रेजों को पानी पिला दिया था, पर अंतत: हार गए। दोनों के बीच 9 मार्च, 1846 को लाहौर में समझौता हुआ।

अंग्रेजों के मन में सिखों ने कैसा खौफ पैदा कर दिया था, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों ने युद्धविराम के सात दिन बाद यानी, 16 मार्च को अमृतसर संधि के जरिये जम्मू-कश्मीर के इलाके को पंजाब से काटकर जम्मू के डोगरा शासक गुलाब सिंह को 75 लाख रुपये में बेच दिया और उसका आधिपत्य लद्दाख, एस्टोर, गिलगित, बाल्टिस्तान तक हो गया। तभी से गिलगित और बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर का हिस्सा हैं।

The whole of Jammu and Kashmir is an integral part of India and tampering with it is not allowed- India

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