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ईद की बधाई स्वीकार करने का हक सिर्फ उसी को है जिसका ईमान मुसल्लम हो……

ईद की बधाई स्वीकार करने का हक सिर्फ उसी को है जिसका ईमान मुसल्लम हो, बाकी का तो सिर्फ ढोंग है
     [object object] ईद की बधाई स्वीकार करने का हक सिर्फ उसी को है जिसका ईमान मुसल्लम हो…… IMG 20180302 WA0668 Copy 252x300 कैसे बधाई दे दूं मैं उन लोगों को ईद की जिन्होंने हजारों वर्षों से पवित्र भारत भूमि पर कालयवन के समय से लगातार आक्रमण किए। सोमनाथ सहित पूरे देश को लूटा। अनगिनत मंदिरों, धर्म स्थानों को नष्ट बर्बाद किया। अनगिनत महिलाओं के साथ बलात्कार किया। अनगिनत हिंदू नर-नारियों को जबरदस्ती धर्म में परिवर्तन कराया।

    जिन्होंने गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों को जमीन में गाड़कर दीवाल में चुनवा दिया। पवित्र सिख गुरू को दहकते तवे पर बैठा दिया। जिन्होंने 99% लड़ाइयां और युद्ध और छल कपट से जीते। इतना ही नहीं जो लगातार मंदिरों को तोड़कर संस्कृत सभ्यता मिटाते जा रहे हैं।

      जिन्होंने ईरान से आस्ट्रेलिया तक पवित्र हिंदू भूमि को मिली भूमि में परिवर्तित कर दिया। जिन्होंने जबरदस्ती कश्मीर, पाकिस्तान, बांग्लादेश ले लिए। जो लगातार भारत में जनसंख्या संतुलन और धार्मिक संतुलन बिगड़ने में जुटे हैं। लगातार आतंकवादी हमले हो रहे हैं।
      
      हिंदुओं के ईद की बधाई असहज करती है। जैसा कि अंदाजा था ईद की बढाईयां देने वालों में अपने हिंदू भाई ही आगे नज़र आए। आते भी कैसे न उन्होंने ख़तना जो करवा रखा है। जिनका रमजान, रोजा और इफ्तार से कोई मतलब नहीं उनकी फेसबुक वाल, वाट्सएप मैसेज और फोन कॉल आना मुझे असहज करता है। ईद की बधाई स्वीकार करने का हक सिर्फ उसी को है जिसने पूरे महीने रोजा रखा हो। जिसका ईमान मुसल्लम हो। बाकी का तो सिर्फ ढोंग है। नेताओं की मजबूरी तो समझ में आती है। हमारी कौन सी मजबूरी है। हम कैसे भूल जाएं कि इनकी जाहिल सोंच ने हमसे हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम का मंदिर छीन लिया। इनकी अतिक्रमनवादी नीतियों ने मथुरा और काशी तक को नहीं छोड़ा। माफ कीजिए यह सेकुलरपने का ढोंग हमसे नहीं हो पाएगा।

   धर्म, संस्कृति, सभ्यता, प्रथाओं और परंपराओं को लेकर हिंदू और मुस्लिम में मूलभूत अंतर है। जहां 100 में 99% मुसलमान मुबारकबाद शब्द प्रयोग करते हैं। वहीं, डर संकोच या शर्म के कारण 99% हिंदू मुबारक शब्द प्रयोग करते हैं I बधाई शब्द का प्रयोग करते लाज, शर्म या डर लगता है।       

       जिन्होंने पूरे मध्य एशिया, ईरान तक फल फूल रहे बौद्ध धर्म को बर्बाद कर दिया। बामियान में भगवान बुद्ध की मूर्तियां बम और डायनामाइट से उड़ाईं। जिन्होंने जैन, पारसी और यहूदी लोगों का करीब-करीब सफाया ही कर दिया। 

      प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप के साथ मैं उनके कुल पुरोहित जिन्होंने शक्ति सिंह और राधा को मरने से बचाया। स्वयं मौत को गले लगाया, दानवीर भामाशाह को जिसके धन से राणा ने अकबर की सेना से जीवन भर संघर्ष किया। उनके प्रिय चेतक को। पूरी तरह मौत के मुंह में गिर चुके राणा को काल के गाल से बचाने वाले झाला मन्ना सिंह सरदार को। चेतक के मर जाने पर मुगलों से उन्हें बचाने वाले भाई शक्ति सिंह को भी सादर नमन करता हूं। जिनके बूते राणा का जीवन बलिदान और शूरवीरता का सर्वोच्च उदाहरण बन सका।
 
      मुझे तो ऐसा कोई कारण नहीं दिखता है कि इनको बधाई और शुभकामनाएं दी जाएं। जो आज भी दिन-रात हर एक पल भारत को जड़ से मिटाकर धर्म फैलाने पर तुले हुए हैं। धन्य हो उदारवादी सनातन हिंदू धर्म के लोगों। आप बहुत ही धन्य हो। जो लगातार सांप को दूध पिलाकर उसके डसने का इंतजार करते हो।
 
    The only right to accept the congratulations of Eid is that of Iman Muslalam, the rest is just preoccupied.

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