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51शक्तिपीठ तीर्थ में पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ विशाल सहस्रचण्डी यज्ञानुष्ठान,लोकगीतों में देवी-आह्वान’ विषय पर लगी लोक चौपाल Capture 8 264x330

51शक्तिपीठ तीर्थ में पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ विशाल सहस्रचण्डी यज्ञानुष्ठान,लोकगीतों में देवी-आह्वान’ विषय पर लगी लोक चौपाल

शास्त्र व विज्ञानसम्मत यज्ञानुष्ठान में कई गई लोकमंगल की कामना***************लोकगायिका कुसुम वर्मा के सुरीले सुरों में सजी भजन संध्या****************’लोकगीतों में देवी-आह्वान’ विषय पर लगी लोक चौपाल
लखनऊ। सद्वृत्ति संवर्द्धन और लोककल्याण के उद्देश्य से 51 शक्तिपीठ तीर्थ में चल रहे सहस्रचण्डी यज्ञानुष्ठान का नवम माँ सिद्धिदात्री के आह्वान के साथ विधिविधान पूर्वक समापन हुआ। नौ दिनों तक चले इस महायज्ञ में पूर्णाहुति के उपरांत वृहद कन्याभोज, विशाल भण्डारा और देवी गीत-संगीत आधारित लोक चौपाल कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।       

आज तीर्थ का स्थापना दिवस भी था। इस मौके पर तीर्थ संस्थापक दम्पत्ति रघुराज दीक्षित मंजु और पुष्पा दीक्षित का श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण अभिनंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। तीर्थ के गर्भगृह में विराजित तपस्विनी माता पार्वती, समस्त 51 शक्ति विग्रहों, दशमहाविद्याओं और शीर्षतल स्थित स्फटिक शिव और विशाल नंदी का भव्य श्रृंगार किया गया।     इस महायज्ञ के अधिष्ठापक वृन्दावन के बगलामुखी उपासक गुरुदेव रामजीवन दास जी महाराज ने समस्त यजमान दंपत्तियों के कल्याण के साथ लोकमंगल की कामना की। यज्ञाचार्य देवप्रकाश शास्त्री के नेतृत्त्व में यज्ञ पुरोहितों और यजमानों ने हवि-देवो को विधिपूर्वक पूर्णाहुति देकर माँ सिद्धिदात्री से सर्वमंगल कामना की।

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आचार्य शिवदत्त पाराशर ने बताया कि लोकरक्षार्थ समस्त यज्ञवेदियों पर कूष्मांडा बलि देकर विश्वशांति की कामना की गई। मुख्य यजमान मुम्बई के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. हरीश प्रभु द्विवेदी ने कहा कि शक्तिपीठ तीर्थ में आयोजित यह सहस्रचण्डी यज्ञ शास्त्र और विज्ञानसम्मत विधिविधान से किया गया। वैज्ञानिक दृष्टि से इस यज्ञ का अपना अलग ही ही महत्त्व है।तीर्थ की ट्रस्टी तृप्ति तिवारी ने बताया कि सुदूर क्षेत्रों से आये श्रद्धालुओं ने परिवार सहित यज्ञशाला की परिक्रमा कर शक्तिपीठ का दर्शन किया। यज्ञानुष्ठान संयोजक वरद तिवारी ने बताया कि सम्पूर्ण आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ख्याल रखा गया। परिक्रमा और दर्शन के विशेष प्रबंध किए गए थे। संध्याकाल में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त लोकगायिका कुसुम वर्मा ने अपने सुरीले स्वरों में पारम्परिक देवी गीत गाकर वातावरण भक्तिभाव से ओतप्रोत कर दिया।

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उन्होंने कई आंचलिक देवी लोकगीत सुनाए। गायिका कुसुम वर्मा ने ‘देवी मोरे अंगना आईं निहुरि के पईंयाँ लगूँ’, पूर्णिमा पांडेय ने ‘नाम रट लागी’, बरखा श्रीवास्तव ने ‘ मन मेरा मंदिर शिव मेरी पूजा’, रेनू गौण व अलका वर्मा ने ‘जब तक आये न हनुमान’, अलका मिश्रा ने ‘ जगदम्बा मोरे अंगना आईं गईं’ भजन सुनाए। इनके अलावा गीता सिंह, सरोज खुल्बे और कंवलजीत ने भजन सुना कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। प्रसिद्ध नृत्यांगना पर्णिका ने देवी लोकगीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में ऑर्गन पर अरविंद वर्मा, ढोलक पर प्रदीप,आक्टोपैड पर रामप्रकाश ने संगत दी।  साहित्यकार डॉ. विद्याबिन्दु सिंह की अध्यक्षता में ‘लोकगीत में देवी आह्वान’ विषय पर लोकचौपाल लगाई गई।    इस वृहद यज्ञानुष्ठान में यज्ञाचार्य देवप्रकाश शर्मा शास्त्री, तीर्थ के प्रधान पुरोहित आचार्य धनञ्जय जी महाराज, आचार्य शिवदत्त पाराशर, रामकुमार मिश्र शास्त्री, महेंद्रशिवशरण दास, शंकर भारद्वाज, अनुराग पांडेय, विजय गौतम शास्त्री, नीरज शास्त्री, सुलभ आदि ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

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