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निष्काम सेवा के सर्वोच्च उदाहरण श्री हनुमान

 वाराणसी /लखनऊ वेद प्रकाश शुक्ला –      किष्किंधा कांड में ऋष्यमूक पर्वत पर बैठे सुग्रीव जब राम-लक्ष्मण को देखते हैं तो भय से हनुमान को उनके बारे में पता करने को कहते हैं। ब्राह्मण रूप धर कर उनसे हनुमान पूछते हैं, ‘आप कौन हैं?’तब राम अपना परिचय देते हैं। हनुमान प्रसन्नता और दुख के मिश्रित भाव से कहते हैं, ‘तब माया बस फिरउं भुलाना। ताते मैं नहि प्रभु पहिचाना।’ वह राम से कहते हैं कि उन्हें तो अपने सेवक को पहचानना चाहिए था। तब राम उत्तर देते हैं,‘सेवक प्रिय अनन्य गति सोउ॥’ अर्थात मुझको सेवक अति प्रिय है, क्योंकि वह अनन्यगति होता है। फिर कहते हैं- सो अनन्य जाके असि मति न टरइ हनुमंत। मैं सेवक सचराचर रूप स्वामि भगवंत॥

     Image result for hanuman jayanti 2017  निष्काम सेवा के सर्वोच्च उदाहरण श्री हनुमान 19032008266 2   अनन्य वही है, जिसकी बुद्धि में यह बात कभी नहीं भूलती कि मैं सेवक हूं और यह चराचर जगत मेरे स्वामी भगवान का रूप है। हनुमान इसीलिए राम को लक्ष्मण से अधिक प्रिय थे। हनुमान जी का जन्म चैत्र मास की पूर्णिमा को तुला राशि के चित्र नक्षत्र में हुआ था। भगवान शंकर के अवतार थे हनुमान। हनुमान जी को शौर्य का प्रतीक माना जाता है। ना केवल दैहिक बल में, बल्कि मानसिक बल में भी।

    रामदूत अतुलित बलधामा। अंजनीपुत्र पवनसुतनामा। महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
इसीलिए उनमें सच्चे सेवक के गुण मिलते हैं। निष्काम सेवा के सर्वोच्च उदाहरण हैं हनुमान जी। हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाना चाहिए और यह मंत्र पढ़ना चाहिए-ओम मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम। वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

भगवान शिव के 11वें रुद्र के रूप में हनुमान जी आज भी मौजूद हैं। अणिमा, लघिमा, महिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व रूपी अष्ट सिद्धियां उन्हें प्राप्त हैं। जब तक राम कथा संसार में प्रचलित है, तब तक हनुमान जी विद्यमान हैं। हनुमत पुराण में हनुमान जी का नाम सुंदर बताया गया है। वाल्मीकि रामायण व तुलसी कृत रामचरितमानस में हनुमान जी की लीलाओं का गान सुंदर कांड में संभवत: इसीलिए किया गया है।

      हनुमान जी के 12 नाम प्रमुख हैं- हनुमान, अंजनी सुत, वायु पुत्र, महाबल, रामेष्ठ, फाल्गुण सखा, पिंगाक्ष, अमित विक्रम, उदधिक्रमण, सीता शोक विनाशन, लक्ष्मण प्राणदाता, दशग्रीव दर्पहा।

The highest example of the untiring service is Sri Hanuman

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