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[object object] तन्वी सेठ पासपोर्ट कांड

तन्वी सेठ पासपोर्ट कांड

 
कल से मैं देख रहा हुं पासपोर्ट_कांडतन्वी सेठ का मामला जबरदस्त छाया हुआ है, और यह क्यों छाया हुआ है विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के गलत फैसले के कारण
 
   [object object] तन्वी सेठ पासपोर्ट कांड              225x300  बात यह है कि तन्वी सेठ पासपोर्ट लेने के सिलसिले में कुछ औपचारिक कार्रवाई पुरा करने पासपोर्ट कार्यालय गई A और B दो चरण की तहकीकात के बाद C यानी तिसरे चरण की तहकीकात हो रही थी,
तन्वी सेठ के दो अलग अलग नाम होने कारण पासपोर्ट अधिकारी विकास मिश्र ने कहा आपके निकाह नामा में जो नाम है उसी पर पोसपोर्ट जारी होगा तब तन्वी सेठ ने कहा कि मुझे यह टाइटल (सिद्दीकी) पसंद नही है
    तब विकास ने नियम व सरकारी आदेश का हवाला देते हुए तन्वी सेठ के पति अनीस सिद्दीकी से कहा कि आप ही एक हलफनामा देकर हिंदू हो जाइये
 
तो विकास मिश्र ने इसमें गलत क्या कहा ?
जबकि खुद शासनादेश है कि एक स्पेलिंग अगर गलत हो जाती है अरुण कुमार सिंह
तो पासपोर्ट निर्गत नही होगा
यहां तो सीधा सीधा नाम मे ही बड़ी विषमता है
 
  
सनसनीखेज खुलासा
तन्वी उर्फ सादिया Tanvi Anus के साथ डेल इंडिया में काम कर चुके एक मित्र ने बताया कि पहले उसका पासपोर्ट सादिया अनस सिद्दीकी के नाम से था लेकिन उसे अमेरिका ने एच1 वीजा रिजेक्ट कर दिया गया फिर उसने अपने पुराने हिंदू नाम तन्वी सेठ के नाम से पासपोर्ट लेने के लिए यह पूरा नाटक रचा!
 
   शादिया ऐनस उर्फ तन्वी शाह मामले में नई खबर अमेरिका रिजेक्ट कर चुका शादिया नाम वाला पासपोर्ट
और पूर्व में ऐसा हो भी चुका है जब जवाहरलाल नेहरु की बेटी प्रियदर्शी इंदिरा ने शराब व्यापारी फिरोज खां के साथ भागकर शादी की थी तो उन्होने खुद अपना नाम बदलकर फिरोज के रंग में रंग गई इंदिरा ने नाम रखा बेगम_मैमुना_खां
 
वो तो बाद में नेहरु ने सोचा कि मुस्लिम बनने से तो फिर यह प्रधानमंत्री कभी नही बन पायेगी, तब नेहरु ने मोहनदास करमचंद गांधी से कहा आप ही कुछ करो समझाओ इंदिरा को
 
तब गांधी ने #फिरोज_खां_व_बेगम_मैमुना_खां को बुलाया सारी बात बताया पर हिंदू धर्म स्वीकार करने के लिए फिरोज खां राजी नही था तब गांधी ने बहुत चालाकी से कहा धर्म परिवर्तन करने को कौन बोल रहा है बस एक हलफनामा देकर अपना टाइटल बदल दो
 
खां से गांधी हो जाओ तब फिरोज मान गया वह खां से गांधी हो गया और प्रियदर्शी इंदिरा पहले नेहरु थी बाद में खां बनी और अंत में गांधी बन गई ।
 
अब ध्यान देने वाली बात यह है कि दोनो अलग अलग टाइटल के साथ कभी नही रहे
या तो इंदिरा खां बन गई या तो फिरोज और इंदिरा दोनो गांधी बन गये
 
तब यहां तन्वी सेठ के प्रकरण में विकास मिश्र कैसे दोषी हो गया जो उन्हे तबादले का डंश झेलना पड़ा
विकास ने तो कानून के दायरे में उचित सलाह दिया था फिर उनपर कार्यवाही क्यों ??
 
क्या मुसलमान प्रेम में सुषमा स्वराज इतनी अंधी हो गई कि नियम कानून सब ताक पर रख दिया ??
 
खैर सोशल मीडिया पुरी तरह से निर्दोष विकास मिश्र के पक्ष में लामबंद हो गया सब कैम्पेन भी चला रहे हैं कि विकास को न्याय मिले
 
इस मुहिम में बड़ी बड़ी हस्ती भी कूद चुकी है गायक मालिनी अवस्थी फिल्म डायरेक्टर अशोक पंडित तथा RSS के प्रवक्ता राजीव तुली भी ट्वीटर पर सुषमा स्वराज को टैग करते हुए लिखा कि बिना जांच के आपने विकास को दोषी कैसे करार कर दिया
 
अगर सच में किसी के उपर कार्रवाई करना है तो उस अधिकारी के उपर करना चाहिए जो तन्वी सेठ का मामला तूल पकड़ने के बाद आनन फानन में पासपोर्ट निर्गत किया
 
क्योंकि पासपोर्ट कोई लेमन चूस/लालीपाप नही है कि रोते हुए बच्चे को थमा दो और वह चुप हो जाय, उसकी एक लम्बी प्रक्रिया होती है
 
तब मैं कहता हुं कि मोदी को तो विकास से बहुत मुहब्बत है, पर सुषमा को ‘विकास’ से इतनी  नफरत क्यों ??

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