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समाजवादी घमासान !चाचा भतीजे के बीच छिड़ी सियासी जंग पैतरे बदल रही है

      चाचा भतीजे के बीच छिड़ी सियासी जंग पैतरे बदल रही है इसके बावजूद अखिलेश यादव को जैसे इस पैतरेबाजी की जरा भी परवाह नहीं है।उन्होंने कहा कि ज्यों ज्यों चुनाव नजदीक आयेगे त्यों त्यों तमाम चींजे देखने को मिलेगी इसके बावजूद साइकिल दौड़ती रहेगी।

      [object object] समाजवादी घमासान !चाचा भतीजे के बीच छिड़ी सियासी जंग पैतरे बदल रही है        300x231सपा प्रमुख अखिलेश यादव चाचा की राजनैतिक ताकत से भली भांति परिचित हैं क्योंकि पिछले दो वर्षों से ताकत आजमाइश चल रही है।दोनों अपने अलग अलग राजनैतिक किले बनाकर तैयार कर चुके हैं और यह जानते भी है कि एक न एक दिन अलग होना ही पड़ेगा।

    आजतक समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल सिंह यादव बड़े भाई के साथ लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं और बड़े भाई दोनों के आराध्य पूज्य बने हुये हैं।सरकार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले शिवपाल यादव को उनके सगे भतीजे अखिलेश यादव ने अक्टूबर 2016 में निकाल दिया था।उसके बाद नेता जी यानी मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाकर अखिलेश यादव खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गये थे और प्रदेश अध्यक्ष पद भी बदल दिया गया था और गायत्री प्रजाति भी मंत्रिमंडल से निकाल दिये गये थे।इस सबके बावजूद मोदी योगी की लहर के बावजूद शिवपाल सिंह विधायक चुनकर वापस विधानसभा लौट आये जबकि अधिकांश प्रत्याशी चुनाव हार गये थे।

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     कहावत हैं कि राजनीति में रिश्तों एवं बड़प्पन का कोई महत्व नहीं होता है। राजनैतिक रास्ते के सफर में राह में रूकावट या रोड़ा डालने वाले को हटाकर लक्ष्य की ओर बढ़ जाना एक राजनैतिक सिद्धांत सा हो गया है। समाजवादी पार्टी में चुनाव पूर्व शुरू हुयी महाभारत की आग आजतक बुझ नहीं पाई है और अंदर ही अंदर सुलग रही है और शिवपाल सिंह यूथ ब्रिगेड उनके राजनैतिक वजूद को बचाये हुये थी।यह सही है कि शिवपाल सिंह की कार्यशैली अखिलेश को पसंद नहीं है यही कारण था कि दो साल बाद भी (अरुण कुमार सिंह )      दिल नहीं मिल पाये।

     ऐन चुनाव के समय पार्टी में विद्रोह हो गया, पार्टी टूटकर बिखर गयी इसके बावजूद अखिलेश जी ने अपनी दिशा नहीं बदली और पार्टी में होते हुये भी बैठकों में उन्हें खास तव्वजो कौन कहे बुलाया तक नहीं गया।         आखिरकार शिवपाल सिंह का दिली गुब्बार जो पिछले दो सालों से धमकी एवं अफवाहों के रूप में चल रहा था परसों खुलकर सामने आ गया है। समाजवादी पार्टी में हाशिये पर चल रहे वरिष्ठ नेता माने जाने वाले शिवपाल सिंह यादव ने एक बार फिर लोकसभा चुनाव के ऐनवक्त पर सेक्युलर मोर्चे के गठन का ऐलान करके विद्रोह की शुरुआत तो कर दी है लेकिन पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है।उन्होंने इस नवगठित मोर्चे को समाजवादी पार्टी के उपेक्षित लोगों का एक प्लेटफार्म बनाया है तथा दावा किया हैकि यह सेक्युलर मोर्चा प्रदेश में मजबूत विकल्प बनकर सामने आयेगा।गठन के बाद उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी लम्बे संघर्ष के बाद बनी है और लगातार उनकी उपेक्षा की जा रही है।

     

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