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शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की महासमाधि की प्रक्रिया जारी, पंचतत्व में होंगे विलीन

शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की महासमाधि की प्रक्रिया जारी, पंचतत्व में होंगे विलीन

     चेन्नै ब्यूरो !कांचीपुरम मठ के 82 वर्षीय शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती का बुधवार शाम निधन होने के बाद गुरुवार को उनकी महासमाधि की प्रकिया जारी है। समाधि से पहले पूजा-पाठ और सभी जरूरी संस्कार भी किए जा रहे हैं। सरस्वती 69वें शंकराचार्य और कांची कामकोटि पीठ के पीठाधिपति थे। पिछले महीने अचानक उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था

 

     देश के सबसे ताकतवर संत माने जाने वाले शंकराचार्य की महासमाधि की प्रक्रिया गुरुवार सुबह शुरू की गई। इस मौके पर देशभर से नामी संत और मठ के लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित भी शंकराचार्य के दर्शन करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। 

  इस मौके पर महासमाधि से पहले किए जाने वाले अनुष्ठान और संस्कार भी मठ के महंतों द्वारा किए जा रहे हैं। कई गणमान्य लोग महासमाधि की प्रक्रिया के दौरान उपस्थित हैं और भारी संख्या में भीड़ भी उमड़ पड़ी है। 

     बता दें, हिंदू मान्यताओं के अनुसार शंकराचार्य कोई यूं ही नहीं बनाया जा सकता और आदि शंकराचार्य को भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। हिंदू धर्म में शंकराचार्य सर्वोच्च पद होता है। महासमाधि की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती पंचतत्व में विलीन होंगे। 

    शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की महासमाधि की प्रक्रिया जारी, पंचतत्व में होंगे विलीन हिंदू धर्म में सबसे अहम और ताकतवर समझे जाने वाली तमिलनाडु स्थित कांची पीठ के पीठाधिपति के रूप में जयेंद्र सरस्वती ने राजनीतिक रूप से भी एक ताकतवर संत का जीवन जीया। जयेंद्र सरस्वती को वेदों का ज्ञाता माना जाता था। भारत के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी भी इनके प्रशंसकों में से एक थे। जयेंद्र सरस्वती ने अयोध्या विवाद के हल के लिए भी पहल की थी। इसके लिए वाजपेयी ने उनकी काफी प्रशंसा की। हालांकि तब जयेंद्र सरस्वती को आलोचना का भी शिकार होना पड़ा। 

      जयेंद्र सरस्वती ने हिंदुओं के प्रमुख केंद्र कांची कामकोटि मठ को और ताकतवर बनाया। उनके समय में इस केंद्र एनआरआई और राजनीतिक शख्सियतों की गतिविधियां बढ़ीं। कांची मठ कई स्कूल और अस्पताल भी चलाता है। देशभर में फेमस शंकर नेत्रालय मठ की तरफ से चलाया जाता है। 

विवादों में भी रहे 
कांची मठ के मैनेजर शंकरारमन की हत्या के आरोप में 11 नवंबबर 2004 को जयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार भी किया गया था। उस समय जयललिता की ही सरकार थी। एक समय ऐसा था जब जयललिता जयेंद्र सरस्वती को अपना आध्यात्मिक गुरु मानती थीं। बताते हैं कि जिस वक्त जयेंद्र सरस्वती को पुलिस गिरफ्तार करने पहुंची तो वह ‘त्रिकाल संध्या’ कर रहे थे। 27 नवंबर 2013 को शंकररमन मर्डर केस में पुडुचेरी की अदालत ने कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती, उनके भाई विजयेंद्र समेत सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया था। Shankaracharya Jayendra Saraswati’s Mahasamadhi will continue in the process;

(एएनआई के इनपुट्स के साथ)

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