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गरीब मुस्लिम परिवारों को विकास की राह दिखा रहा संघ

   मुझे गायत्री मंत्र एवं सरस्वती वंदना पढ़ने में भी कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि यह यहां की परंपरा का हिस्सा है। रुखसार अंग्रेजी विषय से स्नातक भी कर रही हैं। यहीं पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं रैजून बीबी निरक्षर थी, परंतु आज अपने परिवार का खर्च कपड़े सिलकर चला रही हैं। वे भी इस केंद्र की तारीफ करती हैं। 

  [object object] गरीब मुस्लिम परिवारों को विकास की राह दिखा रहा संघ              300x197   रांंची ,विशेष संवाददाता । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की इकाई सेवा भारती द्वारा संचालित बाल संस्कार और प्रशिक्षण केंद्रों में मुस्लिम परिवारों की संख्या बढ़ रही है। वंचित मुस्लिम परिवारों के बीच संघ की इस पहल को सराहना और स्वीकार्यता मिल रही है। यह केंद्र देश भर में चलाए जा रहे हैं। बाल संस्कार केंद्रों पर जहां गरीब मुस्लिम परिवारों के शिक्षा से वंचित बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा मुहैया कराई जा रही है, वहीं प्रशिक्षण केंद्रों में किशोरियों और महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई जैसे स्वरोजगार परक प्रशिक्षण     नि:शुल्कउपलब्ध कराए जा रहे हैं।

    रांंची सहित पूरे झारखंड में 140 बाल संस्कार केंद्र और 18 सिलाई प्रशिक्षण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। ये सभी केंद्र झुग्गी और दलित बस्तियों में चल रहे हैं। इन केंद्रों में हिंदू और मुस्लिम दोनों ही परिवारों के बच्चे और महिलाएं आते हैं। केंद्रों में दैनिक कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्रोच्चार से होती है।  और मुस्लिम दोनों ही इसमें भाग लेते हैं। रांंची के इलाही नगर में चल रहे चार बाल संस्कार केंद्रों से अनेक मुस्लिम बच्चे शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। वहीं हरमू के आजाद हिंद नगर में चल रहे सिलाई प्रशिक्षण केंद्र पर अनेक मुस्लिम लड़कियांं व महिलाएं प्रशिक्षण ले रही हैं।

   मधुपुर में संचालित सिलाई केंद्र से अब तक 350 से अधिक मुस्लिम महिलाएं सिलाई सीखकर स्वावलंबी बन चुकी हैं। आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक और झारखंड में सेवा भारती को स्थापित करने वाले गुरुशरण प्रसाद कहते हैं कि संघ अभावग्रस्त, पिछड़े, शोषित एवं दलितों के उत्थान के लिए हमेशा से कार्यरत रहा है। सेवा भारती संगठन इन्हीं के बीच काम करता है, चाहे वह किसी भी धर्म एवं संप्रदाय से हों।

       आरएसएस वसुधैव कुटुंबकम को आधार मानकर आगे बढ़ रहा है। यही कारण है कि सेवा भारती की ओर से संचालित बाल संस्कार केंद्रों पर मुस्लिम बच्चे और सिलाई प्रशिक्षण केंद्रों पर मुस्लिम महिलाएं भी आती हैं। बच्चों को कक्षा पांंच तक की शिक्षा दी जाती है। कक्षा छह में सरकारी विद्यालयों में नामाकन कराने की व्यवस्था भी की जाती है। शिक्षकों को समाज के सहयोग से पारिश्रमिक दिया जाता है।

     गुरुशरण प्रसाद के अनुसार जम्मू कश्मीर के सीमावर्ती इलाकों में सेवा भारती की ओर से संचालित बाल संस्कार केंद्रों पर तो बड़ी संख्या में मुस्लिम बच्चे पढ़ने आते हैं। राजस्थान में भी बड़ी संख्या में मुस्लिम बच्चे पढ़ते हैं। रांंची में आजाद हिंद नगर स्थित सिलाई केंद्र पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रही रुखसार परवीन कहती हैं, मुझे सेवा भारती के इस केंद्र पर प्रशिक्षण प्राप्त करने में कोई परेशानी नहीं होती है। यहांं कोई भेदभाव नहीं होता है। मैं तो सभी मुस्लिम महिलाओं से भी कहना चाहूंगी कि सेवा भारती की ओर से संचालित केंद्र पर जाकर प्रशिक्षण प्राप्त करें और स्वावलंबी बनें।

 

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