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जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

 आपात व्यवस्थाः जम्मू-कश्मीर में 40 साल में आठ बार राज्यपाल शासन
        [object object] जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी                                300x225राज्यपाल ने कविंदर गुप्ता और महबूबा मुफ्ती से चर्चा कर यह सुनिश्चित किया क्या उनके संबंधित राजनीतिक दल राज्य में सरकार गठन के लिए वैकल्पिक गठबंधन बनाने का इरादा रखते हैं और दोनों नेताओं ने ना में जवाब दिया। राज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष जीए मीर से भी बात की। मीर ने बताया कि उनकी पार्टी के पास अपने बूते पर या गठबंधन सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संख्याबल नहीं है। इसके बाद राज्यपाल ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला के साथ बैठक की। उमर ने कहा कि राज्यपाल शासन और राज्य में चुनावों के अलावा कोई विकल्प नहीं है। 

जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति की बजाए क्यों लगता है राज्यपाल शासन
दरअसल, जम्मू-कश्मीर के संविधान के सेक्शन 92 के मुताबिक, राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता के बाद भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी से 6 महीने के लिए राज्यपाल शासन लगाया जा सकता है। राज्यपाल शासन के दौरान या तो विधानसभा को निलंबित कर दिया जाता है या उसे भंग कर दिया जाता है।

  जम्‍मू कश्‍मीर में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन टूटने के बाद मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने मुख्‍यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कोई भी दल सरकार बनाने के लिए गठबंधन करने को तैयार नहीं है। ऐसे में सूबे में राज्‍यपाल शासन लगना तय हो गया है। जम्‍मू-कश्‍मीर में भारत के अन्‍य राज्‍यों की तरह राष्‍ट्रपति शासन नहीं लगता है। भारत के अन्य राज्यों में प्रदेश सरकार के विफल रहने पर राष्ट्रपति शासन लागू होता है लेकिन जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल का शासन लगाया जाता है।

जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाने को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

राज्यपाल शासन लगने के 6 महीने के भीतर अगर राज्य में संवैधानिक तंत्र दोबारा बहाल नहीं हो पाता है तो भारत के संविधान की धारा 356 के तहत जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन के समय को बढ़ा दिया जाता है और यह राष्ट्रपति शासन में तब्दील हो जाता है। मौजूदा परिस्थिति को मिलाकर अब तक जम्मू-कश्मीर में 8 बार राज्यपाल शासन लगाया जा चुका है।

जम्मू-कश्मीर में इससे पहले 7 बार लग चुका है राज्यपाल शासन
पीडीपी-भाजपा गठबंधन के टूटने के बाद जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन का लागू हो चुका है। पिछले 40 साल में यह आठवां मौका होगा, जब राज्यपाल शासन लागू होगा। विडंबना यह भी है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के दिवंगत पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद की उन राजनीतिक घटनाक्रमों में प्रमुख भूमिका थी, जिस कारण राज्य में सात बार राज्यपाल शासन लागू हुआ।

पहला राज्यपाल शासन
जम्मू – कश्मीर में मार्च 1977 को तत्कालीन राज्यपाल एल के झा ने राज्यपाल शासन लागू किया। उस समय मुफ्ती सईद की अगुवाई वाली राज्य कांग्रेस ने नेशनल कांफ्रेंस के नेता शेख महमूद अब्दुल्ला की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। 

दूसरा राज्यपाल शासन
मार्च 1986 में एक बार फिर मुफ्ती सईद द्वारा गुलाम मोहम्मद शाह की अल्पमत की सरकार से समर्थन वापस लेने के कारण राज्य में राज्यपाल शासन लागू करना पड़ा था। 

तीसरा राज्यपाल शासन
जनवरी 1990 में राज्यपाल के रूप में जगमोहन की नियुक्ति को लेकर फारूक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था। इस कारण सूबे में तीसरी बार केंद्र का शासन लागू हो गया था। सईद उस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री थे और उन्होंने जगमोहन की नियुक्ति को लेकर अब्दुल्ला के विरोध को नजरंदाज कर दिया था। इसके बाद राज्य में छह साल 264 दिन तक राज्यपाल शासन रहा, जो सबसे लंबी अवधि है।

पांचवां राज्यपाल शासन
इसके बाद अक्तूबर  2002 में राज्यपाल शासन लागू हुआ। 

वोहरा के कार्यकाल में चौथा राज्यपाल शासन होगा
 
पूर्व नौकरशाह एनएन वोहर की 25 जून 2008 में जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति की गई थी। उनके कार्यकाल में यह चौथा मौका होगा, जब राज्यपाल शासन लागू होगा। उनके पद संभालने के एक महीने के भीतर ही जुलाई  2008 में राज्यपाल शासन लागू हुआ। 

छठा राज्यपाल शासन
इसके बाद वर्ष 2015 में चुनाव के बाद किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में केंद्र का शासन लागू करना पड़ा। 

सातवां राज्यपाल शासन
पिछली बार मुफ्ती सईद के निधन के बाद 8 जनवरी 2016 को राज्यपाल का शासन लागू हुआ था। उस दौरान पीडीपी और भाजपा ने कुछ समय के लिए सरकार गठन को टालने का निर्णय किया था। तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से संस्तुति मिलने पर जम्मू – कश्मीर के संविधान की धारा 92 को लागू करते हुए वोहरा ने राज्य में राज्यपाल शासन लगाया था। 

President approves governor’s rule in Jammu and Kashmir

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