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राजनीति का मतलब यह नहीं होता है कि राजनैतिक लाभ के लिये देश को ही दुनिया के सामने नंगा कर दिया जाय

     हमारी सेना  बढ़ते आतंकवाद को रोकने के लिए समय समय विशेष स्ट्राइक करनी पड़ती है लेकिन इधर मोदी सरकार के आने के बाद सेना की सार्वजनिक कार्यवाही के रूप में सर्जिकल स्ट्राइक कर चुकी है।यहीं हौसलाफजाई है जिससे हमारी सेना का मनोबल हमेशा बढ़ा रहता है और विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूल बनाकर दुश्मन के छक्के छुड़ा देते हैं।[object object] राजनीति का मतलब यह नहीं होता है कि राजनैतिक लाभ के लिये देश को ही दुनिया के सामने नंगा कर दिया जाय dddd 300x158 इस सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर पहली बार राजनैतिक टीका टिप्पणी एवं अविश्वास वयक्त किया गया है। ताज्जुब तो इस बात का है कि इसमें वह लोग शामिल हैं जो अपने को देशभक्त बताते हैं और राजनैतिक कर्णधार है।

    राजनीति का मतलब यह नहीं होता है कि राजनैतिक लाभ के लिये देश को ही दुनिया के सामने नंगा कर दिया जाय।राजनीति लोकतांत्रिक प्रणाली की संरक्षक और राजनेता लोकतंत्र के रक्षक माने जाते हैं। राजनीति में एक दूसरे के विचारों एवं नीतियों का तो विरोध होता है लेकिन जब देश के आन-बान-शान  पर आ जाती है तो हम राजनीति को भूलाकर देश की सुरक्षा को अधिक महत्व देते हैं।

      गाँवों में लोग कहते हैं कि जबतक बाहरी गाँव का कुत्ता या आदमी नहीं आता है तबतक कुत्ते आपस में लड़ते रहते हैं लेकिन बाहरी आते ही सभी अपना झगड़ा भूल जाते हैं और सब मिलकर उसे गाँव से भगा आते हैं।इसी तरह गाँव हो चाहे देश हो सभी जगहों पर इतनी एकता एकजुटता जरूर होनी चाहिए कि कोई बाहरी दुश्मन आये तो हम उसे भगा सके।कहावत है कि जहां चार बर्तन रहते हैं वहाँ पर खटापट जरूर होती है लेकिन खटापट का मतलब तो यह नहीं होता है कि हम अपने गाँव देश की चिंता ही छोड़ दे।

  [object object] राजनीति का मतलब यह नहीं होता है कि राजनैतिक लाभ के लिये देश को ही दुनिया के सामने नंगा कर दिया जाय IMG 20180302 WA0668 Copy 252x300 इधर राजनैतिक स्तर इतना गिरता जा रहा है कि गिरावट शरमाने लगी है और राजनीति देश के पोषक की जगह शोषक की भूमिका निभाने लगी है।अबतक कभी हमारी सेना का मनोबल देशवासियों न कभी  नही गिरने दिया और आज भी देशवासी अपनी सेना पर गर्व और उसकी बहादुरी प्राण न्यौछावर करते हैं।

   इधर जम्मू कश्मीर की तथाकथित समस्या की आड़ में फलफूल रहा आतंकवाद हमारी सीमाओं पर अघोषित युद्ध बन गया है और उसे रोकने में हमारी सेना के सुरक्षा बलों एवँ बेगुनाह आम लोगों की जान जा रही है। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान पोषित आतंकवाद हमें ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को आतंकित कर रहा है।

     अबतक सेना की सर्जिकल कार्यवाही पर अगुँली उठायी जा रही थी लेकिन जब  पूरी कार्यवाही का वीडियो समाचार चैनलों पर चलने लगा तो फिर उस पर भी टीका टिप्पणी शुरू हो गई है।अब सरकार पर वीडियो के सहारे चुनावी लाभ लेने का आरोप लगने लगे हैं।

      यह कहना गलत न होगा कि राजनीति और कुछ राजनीतिज्ञों द्वारा हमारी सेना को फुटबाल की तरह राजनैतिक मैदान में स्वार्थ सिद्धि का साधन बनाया जा रहा है जो अच्छी बात नहीं है।अन्य मुद्दों के सहारे भी राजनीति हो सकती है और कोई जरूरी नहीं होता है कि सेना पर ही टीका टिप्पणी करके उसका हौसला अफजाई करने की जगह मनोबल गिराकर उसे हतोत्साहित किया जाय। सेना किसी दल की नहीं बल्कि देश की होती है इसीलिए देश सर्वोच्च प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति इसके तीनों अंगों का मुखिया होता है। सेना का राजनैतिक लाभ के लिये इस्तेमाल करने की परम्परा अच्छी बात नहीं है और न ही सेना की कार्यवाही पर अविश्वास या टीका टिप्पणी करना राष्ट्रहित में नहीं कहा जा सकता है।Politics does not mean that the country should be exposed to the world for political gain.

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