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वीआईपी काफिले के लिए पुलिस ने रोकी एंबुलेंस, वीडियो वायरल, विभागीय जांच के आदेश                   holdingupanambulancetoenableVIPmovement 660x330

वीआईपी काफिले के लिए पुलिस ने रोकी एंबुलेंस, वीडियो वायरल, विभागीय जांच के आदेश

वीडियो में कुछ पुलिसकर्मी मरीज को अस्पताल ले जा रही एक एंबुलेंस का सिर्फ इसलिए रोककर खड़े हैं, क्योंकि वहां से मलेशिया के प्रधानमंत्री का काफिला गुजरने वाला था।..

 

नई दिल्ली,ब्यूरो  (upj)। आम आदमियों की सुरक्षा करने का दावा करने वाली दिल्ली पुलिस पर वीवीआईपी मूवमेंट के कारण आम आदमी की जान खतरे में डालने वाला वीडियो वायरल हुआ है।

वीआईपी काफिले के लिए पुलिस ने रोकी एंबुलेंस वीडियो वायरल विभागीय जांच के आदेश  वीआईपी काफिले के लिए पुलिस ने रोकी एंबुलेंस, वीडियो वायरल, विभागीय जांच के आदेश big  E0 A4 B5 E0 A5 80 E0 A4 A1 E0 A4 BF E0 A4 AF E0 A5 8BholdingupanambulancetoenableVIPmovementवीडियो में कुछ पुलिसकर्मी मरीज को अस्पताल ले जा रही एक एंबुलेंस का सिर्फ इसलिए रोककर खड़े हैं, क्योंकि वहां से मलेशिया के प्रधानमंत्री का काफिला गुजरने वाला था।

    मामला शनिवार का है, जब राजघाट से किसी वीवीआईपी का काफिला गुजरने वाला था। इस दौरान पुलिस ने ‘सुरक्षा’ के एहतियातन सड़क का यातायात बंद कर दिया था।

मामला पुलिस के संज्ञान में आने के बाद विभागीय जांच जरूर शुरू कर दी गई है, लेकिन एक बार फिर वीआईपी के प्रोटोकॉल के आगे आम आदमी की जान को धता बता दिया गया है।

       दरअसल, एक फेसबुक पोस्ट वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए थे, जिसमें सोनीपत से आ रही एंबुलेंस को राजघाट पर वीआईपी मूवमेंट के चलते रोकने का आरोप लगाया गया था।

दिल्ली पुलिस विशेष आयुक्त व मुख्य प्रवक्ता दीपेंद्र पाठक ने बताया कि पुलिस का एंबुलेंस रोकने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन जब तक एंबुलेंस को यातायात से बाहर निकाला गया, तब तक वीआईपी का काफिला आ चुका था और ऐसे में एंबुलेंस को रास्ता देना दुर्घटना का कारण हो सकता था।

 

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एंबुलेंस में एक घायल बच्चे को ले जाया जा रहा था, जो सोनीपत से दिल्ली ईलाज के लिए आया था।

विडियो बनाने वाले प्रीत नरूला मध्य दिल्ली के एक बैंक में काम करते हैं और सुबह नौ बजे के करीब वह अपने दफ्तर जा रहे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि मलेशियाई प्रधानमंत्री के काफिले को गुजरना था, इसलिए यातायात को बंद करके रखा गया है।

      इसी बीच यातायात में एक एंबुलेंस भी फंस गई, लेकिन पुलिसकर्मियों ने एंबुलेंस को निकालने के लिए यातायात नहीं खोला, अलबत्ता आम नागरिकों को ‘इधर-उधर’ करके एंबुलेंस को रास्ता देना पड़ा।

उधर, दीपेंद्र पाठक ने दावा किया कि एंबुलेंस यातायात में बहुत पीछे फंसी थी और जब तक वह आम नागरिक व पुलिस के सहयोग से यातायात में सबसे आगे पहुंची, तब तक मलेशियाई प्रधानमंत्री का काफिला आ चुका था।

      सूत्रों की मानें तो एंबुलेंस के अंदर बच्चे के सिर व नाक से खून बह रहा था, जिसका सोनीपत स्थित उसके गांव में एक्सीडेंट हो गया था। नजदीकी अस्पताल से उसे बेहतर ईलाज के लिए दिल्ली रवाना किया गया था।

      बता दें कि दीपेंद्र पाठक दावा कर रहे हैं कि एंबुलेंस को महज चंद मिनट ही रोककर रखा गया, लेकिन सूत्र मानते हैं कि वहां बहुत देर तक एंबुलेंस खड़ी रही और पुलिस-लोगों के बीच एंबुलेंस को छोड़ऩे अथवा न छोड़ऩे को लेकर बहस होती रही।

 संवाद सूत्र 

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