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PNB घोटोला: नीरव मोदी को भारत लाना ज्यादा मुश्किल नहीं!              2

PNB घोटोला: नीरव मोदी को भारत लाना ज्यादा मुश्किल नहीं!

नई दिल्ली 
         पीएनबी घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती है देश छोड़कर भागे मुख्य आरोपी नीरव मोदी पर मुकदमा चलाने के लिए उन्हें भारत लाना। यह काम प्रत्यर्पण के जरिए हो सकता है, लेकिन प्रत्यर्पण की कार्रवाई से जुड़ी पेचीदगियों के चलते कई बार ऐसा संभव नहीं हो पाता या फिर कार्रवाई पूरी होने में काफी वक्त लग जाता है। विजय माल्या का उदाहरण सबके सामने है, जिन्हें कई कोशिशों के बाद भी अभी तक ब्रिटेन से भारत नहीं लाया जा सका है। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि नीरव मोदी इस वक्त किस देश में है, लेकिन जानकार मान रहे हैं कि उसे भारत लाना उतना मुश्किल नहीं होगा।

   PNB घोटोला: नीरव मोदी को भारत लाना ज्यादा मुश्किल नहीं!              2 300x229   भारत में विदेश भागे आरोपियों को प्रत्यर्पित करने का दूसरा सबसे बड़ा कारण होता है आर्थिक अपराध। नीरव मोदी का अपराध भी इसी श्रेणी में आता है। भारत की 47 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि है। साथ ही 9 अन्य देशों के साथ प्रत्यर्पण व्यवस्था पर सहमति है। प्रत्यर्पण कानून, 1962 के तहत अगर कोई व्यक्ति भारत में अपराध करके विदेश भाग जाता है तो भारत उसके प्रत्यर्पण की गुजारिश कर सकता है। साथ ही दूसरे देशों में अपराध को अंजाम देकर भारत आने वाले अपराधियों को भारत संबंधित देश को सौंप देता है। 


      हालांकि प्रत्यर्पण के लिए कई तरह की शर्तें भी होती हैं। जिस कृत्य के लिए आरोपी को प्रत्यर्पित किया जाना है, वह दोनों देशों में दंडनीय अपराध की श्रेणी में होना चाहिए। साथ ही उस अपराध के लिए कम से कम एक साल तक की सजा का प्रावधान होना चाहिए। उदाहरण के तौर पर, समलैंगिकता किसी देश में अपराध हो सकता है और किसी देश में नहीं। ऐसे में समलैंगिकता के आरोपी को उस देश से प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता, जहां इसे अपराध नहीं माना जाता। 

       इसके अलावा कई देश इस आधार पर भी प्रत्यर्पण का निवेदन खारिज कर देते हैं कि आरोपी को होने वाली संभावित सजा, उस देश में चलन में नहीं होती। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मैक्सिको और ज्यादातर यूरोपीय देश उन आरोपियों को प्रत्यर्पित करने से इनकार कर देते हैं, जिन्हें दूसरे देश में उम्र कैद मिलने की संभावना होती है। इसी तरह फ्रांस, जर्मनी, रूस, ऑस्ट्रिया, चीन, ताइवान और जापान अपने नागरिकों को प्रत्यर्पित करने से इनकार कर देते हैं।

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