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अब दुनिया चखेगी ‘ब्लैक राइस’, की जाएगी ब्रांडिंग

अब दुनिया चखेगी ‘ब्लैक राइस’, की जाएगी ब्रांडिंग

 
विलुप्त हो रहीं प्रजातियां : देश में चावल की परंपरागत प्रजातियां तेजी से घटती गईं। वर्तमान में लगभग पांच सौ प्रजातियां ही उपलब्ध हैं। दो दशक में इसमें आधे से अधिक कमी आई है। 

वाराणसी [रुपाली सक्सेना ] ।ब्लैक राइस, इसके नाम पर मत जाइये। चावल की यह प्रजाति बड़े काम की है। मणिपुर, तमिलनाडु व बंगाल से निकलकर भविष्य में इसका स्वाद देश-दुनिया के लोग चखेंगे। यह संकल्पना साकार करेगा बनारस में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान केंद्र।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित इस केंद्र में परंपरागत चावल की प्रजातियों पर फोकस किया जाएगा। शोध कर उनकी गुणवत्ता बढ़ाई जाएगी, इससे पैदावार बढ़ेगी। शुरुआत में उत्तर प्रदेश के काला नमक, विष्णुभोग, जीआर-32, सोनाचूर व राजरानी चावल में भी पोषक तत्वों की उत्पत्ति की जाएगी।

अब दुनिया चखेगी ‘ब्लैक राइस’, की जाएगी ब्रांडिंग
ब्लैक राईस फार्मिंग

विशेषज्ञों के अनुसार ब्लैक राइस में बासमती चावल से अधिक गुण होते हैं। महकदार, स्वादिष्ट होता है। बस लंबाई में छोटा होता है। इसमें संभावनाओं की तलाश की जाएगी। इसके तत्वों की जानकारी निकालकर पौष्टिकता बढ़ाई जाएगी।


बोले अधिकारी : ब्लैक राइस की पैदावार कम है। इसमें बासमती चावल के कुछ तत्वों से अधिक गुणवत्ता है। इसकी पौष्टिकता बढ़ाकर मार्केटिंग में आसानी होगी। इसके अलावा देश की परंपरागत चावल की प्रजातियों को सहेजने व पापुलर बनाने के लिए इरी के वैज्ञानिक पूरी ताकत लगाकर काम करेंगे। -डा. उमाशंकर सिंह, डायरेक्टर, इरी। 

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