Wednesday , April 24 2019 [ 5:45 AM ]
Breaking News
Home / अन्य / मुंबई: मराठी लेखक ने महाराष्ट्र सरकार की पेंशन लेने से किया इनकार,जाने क्यों???
[object object] मुंबई: मराठी लेखक ने महाराष्ट्र सरकार की पेंशन लेने से किया इनकार,जाने क्यों???              1 622x330

मुंबई: मराठी लेखक ने महाराष्ट्र सरकार की पेंशन लेने से किया इनकार,जाने क्यों???

       मुंबई: मराठी लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता विनय हार्दिकर ने आपातकाल के दौरान जेल में गये लोगों के लिए भाजपा की अगुवाई वाली महाराष्ट्र सरकार की पेंशन पेशकश को नहीं लेने का फैसला किया है. हार्दिकर की 1978 की पुस्तक ‘जनाचा प्रवाहो चालिला’ आपातकाल पर प्रामाणिक टिप्पणी समझी जाती है. उन्होंने कहा कि सरकार का (पेंशन का) फैसला विभिन्न कारणों से अनैतिक है. उन्होंने जनवरी , 1976 में सत्याग्रह में हिस्सा लिया था और गिरफ्तारी दी थी. उन्हें पुणे के समीप यरवदा जेल में डाल दिया गया था. उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने पेंशन नहीं लेने का फैसला किया है.

       [object object] मुंबई: मराठी लेखक ने महाराष्ट्र सरकार की पेंशन लेने से किया इनकार,जाने क्यों???              1 300x194मैं मानता हूं कि इस फैसले का राजनीतिक पक्ष है जो भाजपा अध्यक्ष के संपर्क फोर समर्थन अभियान का हिस्सा जान पड़ता है. मैं उसमें फंसना नहीं चाहता. ’’ लेखक ने कहा कि आपातकाल लगाने के इंदिरा गांधी के फैसले का समर्थन करने वाली शिवसेना अब राज्य सरकार में घटक है अतएव पेंशन की यह पेशकश अनैतिक है. हार्दिकर ने कहा, ‘‘ सरकार को कुछ मुद्दों पर सफाई देनी चाहिए. पहला , जेल में गुजारे गये समय के अनुसार लोगों के बीच भेदभाव क्यों ?’’ उन्होंने कहा, ‘‘ जो जेल में डाले गये थे, वे दो प्रकार के लोग थे.

    ऐसे लोग, जिन्होंने सत्याग्रह किया (और जिन्होंने गिरफ्तारी दी थी) तथा ऐसे लोग जिन्हें किसी विरोध प्रदर्शन से पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया था. मुस्लिम लीग और आनंद मार्ग जैसे सांप्रदायिक संगठनों के कार्यकर्ता भी थे. कुछ नक्सली भी हिरासत में लिये गये थे. क्या वे भी इस उदार पेंशन के हकदार हैं ?’’ उन्होंने सवाल किया, ‘‘ आपातकाल में जेल में डाल दिये गये अन्य लोगों की तुलना में आरएसएस के कार्यकर्ता अधिक थे.

About Arun Kumar Singh

Check Also

लोकतंत्र के महापर्व यानि लोकसभा चुनाव 2019: दूसरे फेज की वोटिंग में करीब 66 फीसदी वोट पड़े Capture 14 298x165

लोकतंत्र के महापर्व यानि लोकसभा चुनाव 2019: दूसरे फेज की वोटिंग में करीब 66 फीसदी वोट पड़े

लोकतंत्र के महापर्व यानि लोकसभा चुनाव के लिए 18 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान …

Leave a Reply

Copyright © 2017, All Right Reversed.