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देश के पहले आईआईटी ग्रेजुएट मुख्यमंत्री थे मनोहर पर्रिकर, ऐसे हुई राजनीति में एंट्री

(मनोहर पर्रिकर): लंबे समय से पैंक्रियाज से संबंधित बीमारी से जूझ रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन हो गया है। वह लंबे समय से अपनी बीमारी का इलाज करा रहे थे।
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बीजेपी को पहली बार सत्ता में लाए थे ‘मिस्टर क्लीन’ मनोहर पर्रिकर

नई दिल्ली: पैंक्रियाज से संबंधित बीमारी से लंबे समय से जूझ रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से अपनी बीमारी का इलाज करा रहे थे। 13 दिसंबर 1955 को पैदा हुए पर्रिकर गोवा में बीजेपी के दिग्गज नेता थे। उनके नाम कई उपलब्धियां हैं। वह ना सिर्फ बीजेपी से गोवा के मुख्यमंत्री बनने वाले पहले नेता हैं बल्कि मोदी सरकार में रक्षा मंत्री का पद भी संभाला। उन्हीं के कार्यकाल में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी। 

पर्रिकर का जन्म गोवा के मपूसा में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई लोयोला हाईस्कूल से की। सेंकेंडर एजुकेशन के बाद पर्रिकर ने ग्रेजुएशन के लिए आईआईटी बॉम्बे का रुख किया। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। पर्रिकर भारत के किसी राज्य के मुख्यमंत्री बनने वाले ऐसे पहले शख्स हैं जिन्होंने आई.आई.टी. से ग्रेजुएशन किया। पर्रिकर को मुख्यमंत्री बनने के बाद एक बड़े दुख ने घेर लिया था। साल 2001 में उनकी पत्नी मेधा की मृत्यु हो गई। उनके दो बेटे हैं उत्पल और अभिजीत। 

बीजेपी को गोवा में मजबूत करने और उसे सत्ता में लाने का श्रेय भी पर्रिकर को ही दिया जाता है। इसके अलावा भारतीय अंतरारष्ट्रीय फिल्म महोत्सव को गोवा लाने का भी श्रेय उन्हीं को जाता है। कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ने वाले  मनोहर पर्रिकर साल 2000 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। बीजेपी के सदस्य के रूप में पार्रिकर को पहली बार 1994 में गोवा की विधान सभा के लिए चुना गया था। वह 1999 में जून से नवंबर  तक विपक्ष के नेता भी रहे थे।

और पढ़ें: मनोहर पर्रिकर को सीएम पद पर बनाए रखना भाजपा की ‘क्रूरता’ है : शिवसेना  

हालांकि, पहली मर्तबा उनकी सरकार सिर्फ दो साल ही चल पाई। इसके बाद वह जून 2002 में दोबारा गोवा के सीएम बने और 2005 तक शासन किया। 29 जनवरी, 2005 को बीजेपी के 4 नेताओं के इस्तीफे की वजह से पर्रिकर की सरकार अल्पमत में आ गई थी। पर्रिकर ने बहुमत होने का दावा किया और फरवरी 2005 में उन्होंने बहुमत साबित भी कर दिया। मगर अन्य कारणों से उन्हें अपना सीएम पद छोड़ना पड़ा। 

इसके बाद पर्रिकर ने 2012 में दोबार मुख्यमंत्री का पद संभाला और वह 2014 तक इस पद पर रहे। साल 2013 में गोवा होने वाले भाजपा के सम्मेलन से पहले ही पर्रिकर ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में नरेंद्र मोदी का नाम प्रस्तावित किया था केंद्र में बीजेपी की सरकार आने के बाद पर्रिकर को रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी गई।

वह 2014 में रक्षा मंत्री बने और 2017 तक इस पद पर रहे। 2017 में उन्होंने रक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और वह एक बार फिर गोवा के मुख्यमंत्री बन गए। गोवा में 2017 में विधानसभा चुनाव के परिणामों के बाद बीजेपी को बहुमत नहीं मिला था। लेकिन क्षेत्रियों पार्टियां पर्रिकर के नाम पर बीजेपी की सरकार को अपना समर्थन देने के लिए तैयार हो गईं। कहा जाता है कि फिलहाल बीजेपी सरकार में सहयोगी करने वाले पार्टियों में से एक महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी ने घोषणा की थी कि पर्रिकर को मुख्यमंत्री के रूप में वापस लाया जाता है तो वह भाजपा को समर्थन देगी। पर्रिकर गोवा में मिस्टर क्लीन के नाम से जाने जाते थे। उनका शुमार ऐसे नेताओं में होता है जिस पर भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा।

देश के पहले आईआईटी ग्रेजुएट मुख्यमंत्री थे मनोहर पर्रिकर, ऐसे हुई राजनीति में एंट्री

देश के सबसे साफ और ईमानदार छवि के नेताओं में शुमार मनोहर पर्रिकर आईआईटी से पास होकर भारत के किसी प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति थे। जानिए कैसे राजनीति में हुई उनकी एंट्री।

पणजी: लंबे समय से बीमार चल रहे गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार शाम निधन हो गया वो 63 वर्ष के थे। पर्रिकर का गिनती देश के सबसे ईमानदार और बेदाग छवि वाले नेताओं में होती थी। वो देश के पहले ऐसे मुख्यमंत्री थे जिन्होंने आईआईटी से ग्रेजुएशन की थी। उन्होंने 1978 में आईआईटी बॉम्बे से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की थी। 

26 साल की उम्र में पर्रिकर ने आरएसएस का दामन थाम लिया। तब तक वो आईआईटी से स्नातक की डिग्री हासिल कर चुके थे। उन्हें गोवा में उनके गृह नगर मपूसा का संघचालक नियुक्त किया गया था। 1990 में उन्होंने रामजन्म भूमि आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। वो गोवा में इस आंदोलन की कमान संभालने वाले प्रमुख लोगों में से एक थे। आरएसएस के जमीनी स्तर का कार्यकर्ता होने की वजह से संघ का विश्वास उन्हें हासिल था।

पार्रिकर की सक्रिय राजनीति में एंट्री आरएसएस की वजह से हुई। उन्हें आरएसएस ने भाजपा में भेजा। पहली बार गोवा में वो 1994 में दूसरे सदन के लिए चुने गए।  इसके बाद धीरे-धीरे उनका कद तेजी से बढ़ता गया और 1999 में वो गोवा में नेता प्रतिपक्ष बने। इसके बाद 24 अक्टूबर 2000 को उन्होंने पहली बार गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वो चार बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।  वो भारतीय जनता पार्टी की तरफ से गोवा के मुख्यमंत्री बनने वाले वह पहले नेता थे।

साल 2014 में नरेंद्र मोदी के देश का प्रधानमंत्री बनने के बाद गोवा के तत्कालीन मुख्यमंत्री पर्रिकर को केंद्र में रक्षा मंत्री नियुक्त किया गया। रक्षामंत्री के रूप में दो साल लंबे कार्यकाल में उन्होंने सालों से पेंडिंग पड़े राफेल विमान सौदे को अंतिम दौर तक पहुंचाया। इसके बाद गोवा विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद छोटे दलों को साथ लाने के लिए पर्रिकर को गोवा वापस लौटना पड़ा और वो तब से लेकर अपने देहांत तक इस पद पर बने रहे।देश के रक्षामंत्री  का पद संभालने के बाद बाद उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का सदस्य चुना गया था। 

पर्रिकर का जन्म गोवा के मपूसा में 13 दिसंबर 1955 को गौड़ सारस्वत ब्राम्हण परिवार में हुआ था। उनकी शुरुआती शिक्षा गोवा के लोयला हाई स्कूल में हुई। मराठी भाषा में अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए आईआईटी बॉम्बे में दाखिला लिया। 

गोवा में उनकी पहचान पीपुल्स सीएम के रूप में थी। कोई भी व्यक्ति उनसे मुलाकात कर सकता था।  मुख्यमंत्री रहते हुए भी मनोहर पर्रिकर सायकिल और स्कूटर पर सफर करते थे और कभी भी लोगों के बीच उनकी राय जानने पहुंच जाते थे। उन्हें गोवा में किसी भी जगह आम नागरिक की तरह घूमते देखा जा सकता था। 

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