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दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ और मजबूत होंगे भारत के रिश्ते

   मोदी का दुनिया के अहम नेताओं के समकक्ष उनका महत्वपूर्ण भाषण चीन, रूस, फ्रांस और कॉमनवेल्थ देशों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद होगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह व्यापार के लिए दुनिया को क्या संदेश दे रहे हैं। 

   राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी प्रोटोकॉल्स को दरकिनार करते हुए मुद्दों पर सीधी बात करने का मन बना चुके हैं और इस संवाद के दौरान नेताओं के साथ मुलाकात में वह भारत की रणनीति एवं हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति के लिए नई दिल्ली की रणनीति की रूपरेखा पेश कर सकते हैं। 

[object object] दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ और मजबूत होंगे भारत के रिश्ते kkk 300x225   प्रधानमंत्री की यह यात्रा भारत-दक्षिणपूर्व एशिया के संबंधों को नया आयाम जोड़ेगी। भारत के गणतंत्र दिवस पर आसियान देशों के प्रमुखों के आगमन के बाद इन देशों के साथ भारत के रिश्तों में नई ऊर्जा आई है।
 

   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार से तीन दक्षिणपूर्व एशियाई देशों इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर के दौरे पर रवाना हो रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी के इस दौरे का उद्देश्य दुनिया में तेजी के साथ विकास कर रही इन अर्थव्यवस्थाओं के साथ भारत भी अपना कारबोर बढ़ाने पर होगी। साथ ही एशिया की समस्याओं पर वह अपने नजरिए को पेश कर सकते हैं।

   पीएम मोदी 29 मई को इंडोनेशिया पहुंचेंगे और इसके बाद वह मलेशिया एवं सिंगापुर तस्वीर साभार: PTI

के लिए रवाना होंगे। सिंगापुर में प्रधानमंत्री मोदी अपने समकक्ष से मुलाकात करेंगे और शांग्री-ला डायलॉग में अहम भाषण देंगे। समझा जाता है कि इस डायलॉग में कई देशों के महत्वपूर्ण नेता शामिल होंगे

   मोदी का दुनिया के अहम नेताओं के समकक्ष उनका महत्वपूर्ण भाषण चीन, रूस, फ्रांस और कॉमनवेल्थ देशों के प्रमुखों के साथ बैठक के बाद होगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह व्यापार के लिए दुनिया को क्या संदेश दे रहे हैं।

शांगरी-ला डॉयलाग काफी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री यहां पहली बार भाषण देंगे। दुनिया में व्याप्त अनिश्चितताओं एवं समस्याओं को लेकर उनके नजरिए पर दुनिया भर की नजरें होगी।

शांगरी-ला डॉयलाग का पहली बार आयोजन 2002 में हुआ था। इसका आयोजन वार्षिक होता है जिसमें एशिया-प्रशांत क्षेत्र एवं क्षेत्र की सुरक्षा के लिए व्यापक रूप से चिंतित देशों के रक्षा मंत्री, सेना प्रमुख और रक्षा से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल होते हैं। समझा जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी चीन, रूस और फ्रांस के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात के बाद एशिया जिन समस्याओं से जूझ रहा है उस पर भारत का रुख स्पष्ट करेंगे।  

      सिंगापुर के नेशनल यूनिवर्सिटी के थिंट टैंक इंस्टीट्यूट ऑफ साउथ एशियन स्टडीज में सीनियर रिसर्च फेलो डॉक्टर अमितेंदु पालित का कहना है, ‘इस क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा कई कारणों के लिए सबकी नजरों में रहेगा। दुनिया यहां देखेगी कि यहां किस प्रकार से कारोबारी रिश्ते पनप रहे हैं।’   prime-minisiter-narendra-modis-south-east-asia-visit-to-mark-new-phase-of-india-southeast-asia-ties-political-observers/

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