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करतारपुर कॉरिडोर पर बातचीत के लिए अटारी पहुंचा भारतीय शिष्टमंडल, उठा सकता है खालिस्तान का मुद्दा

करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच आज बैठक हो रही है। इस बैठक में भारत खालिस्तान का मुद्दा उठा सकता है।
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नई दिल्ली : पुलवामा आतंकवादी हमले की छाया के बीच करतार कॉरिडोर के निर्माण पर भारत और पाकिस्तान के शिष्टमंडल के बीच गुरुवार को मुलाकात हो रही है। इस बैठक में करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण के तौर-तरीके को अंतिम रूप दिया जाएगा। दोनों देशों के बीच यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब पुलावामा में आतंकवादी हमले के खिलाफ भारत के लोगों में गुस्सा है। इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारतीय शिष्टमंडल अटारी बॉर्डर पहुंच गया है।

पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी संगठन घोषित करने के संयुक्त राष्ट्र में आए प्रस्ताव पर चीन ने बुधवार को एक बार फिर अड़ंगा लगा दिया। मसूद ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली है और जैश का यह सरगना पाकिस्तान में है। पुलवामा हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंधों में तनाव है और चीन के इस कदम ने पाकिस्तान एवं आतंकवाद विरोधी भावनाओं को और तीव्र किया है। ऐसे में करतारपुर कॉरिडोर पर बैठक के समय को लेकर कई लोग सवाल उठा रहे हैं।

वहीं, कई लोगों का कहना है कि करतारपुर कॉरिडोर को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। यह राजनीतिक नहीं बल्कि धार्मिक एवं भावनात्मक मुद्दा है। भारत ने पहले ही साफ कर दिया है कि करतारपुर कॉरिडोर की पहल से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि दोनों देश बातचीत करने के लिए तैयार हो गए हैं। भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं हो सकती।

समझा जाता है कि करतारपुर कॉरिडोर पर हो रही इस बैठक में भारतीय शिष्टमंडल पाकिस्तान से यह स्पष्ट करेगा कि इस कॉरिडोर का इस्तेमाल खालिस्तान प्रोपगैंडा फैलाने के लिए न किया जाए। यह जाहिर है कि खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों को पाकिस्तान में शरण मिली हुई है। कुछ समय पहले भारतीय अधिकारियों को पाकिस्तान के गुरुद्वारे में जाने से रोक दिया गया था।

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