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महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री कृपा शंकर सिंह के बेटे नरेन्द्र मोहन सिंह को कोर्ट से मिली जमानत !सोमवार तक आ सकते है जेल से बहार madhu koda kripashankar 20100301 576x330

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री कृपा शंकर सिंह के बेटे नरेन्द्र मोहन सिंह को कोर्ट से मिली जमानत !सोमवार तक आ सकते है जेल से बहार

रांची। झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के ४०००करोड मनी लांड्रिंग मामले में महारष्ट्र सरकार के पूर्व गृह मंत्री कृपा शंकर सिंह के बेटे  दामाद नरेंद्र मोहन सिंह को झारखंड हाई कोर्ट से राहत मिल गई है। गुरुवार को हाई कोर्ट ने दोनों को जमानत दे दी है।

Image result for मधु कोड़ा साथ कृपा शंकर सिंह  महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री कृपा शंकर सिंह के बेटे नरेन्द्र मोहन सिंह को कोर्ट से मिली जमानत !सोमवार तक आ सकते है जेल से बहार koda kripa 1452665नरेंद्र मोहन के खिलाफ कमलेश सिंह के ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए एक ही पैसे को कई प्रक्रियाओं में घुमाने का आरोप है। एक ही दिन में 83 लाख रुपये चार एकाउंट से होते हुए कमलेश के पास पहुंचा था। नरेंद्र मोहन सिंह महाराष्ट्र के दिग्गज कांग्रेस नेता कृपाशंकर सिंह के बेटे हैं।

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मनी लांड्रिंग मामले में पूर्व मंत्री कमलेश सिंह के पुत्र सूर्य सोनल सिंह व दामाद नरेंद्र मोहन सिंह ने ईडी के विशेष कोर्ट अनिल कुमार मिश्रा की अदालत में बीते शनिवार को आत्मसमर्पण किया था। तब से ही वे रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में न्यायिक हिरासत में थे।

   इससे पहले 2मर्च २१२ को कृपाशंकर सिंह के मुंबई आवास पर आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापेमारी हुई थी इसमें संपत्ति के अलावा प्रतिबंधित बोर के कारतूस भी मिले थे !और कृपा शंकर सिंह पर आर्म्स एक्ट के तहत भी मुकदमा पंजी कृत किया गया था!

मुंबई [ब्यूरो ]। महाराष्ट्र के पूर्व गृह राज्य मंत्री और मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष कृपाशंकर सिंह पर शस्त्र अधिनियम [आ‌र्म्स एक्ट] की धारा 3/25 और 30 के तहत भी मामला दर्ज कर लिया गया है। मुंबई के निर्मल नगर पुलिस थाने में सिंह के विरुद्ध यह मामला उनके घर से मिले 400 कारतूसों के संबंध में दर्ज किया गया है।

बांबे हाई कोर्ट के आदेश पर कुछ सप्ताह पहले मुंबई पुलिस के विशेष जांच दल [एसआइटी] को सिंह के घर की तलाशी लेते वक्त ये कारतूस मिले थे। इनमें से कुछ कारतूस ऐसे हथियारों के थे, जिनके लाइसेंस सिंह या उनके परिवार के किसी सदस्य के पास नहीं हैं। सिंह और उनके परिजनों के पास जिन हथियारों के लाइसेंस हैं, उनके भी कारतूस निर्धारित संख्या से ज्यादा पाए गए थे। शुक्रवार देर रात सिंह के विरुद्ध शस्त्र अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें वांछित करार दे दिया गया। सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में पहले ही इसी थाने में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। नई प्राथमिकी से उनकी मुश्किलें और बढ़ती दिख रही हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार सिंह के पास विभिन्न हथियारों के पांच लाइसेंस हैं। इनमें से तीन खुद उनके नाम हैं और एक-एक लाइसेंस उनके पुत्र नरेंद्र मोहन और पत्नी मालती सिंह के नाम से है। नरेंद्र मोहन के नाम बने लाइसेंस की अवधि 2006 में ही खत्म हो चुकी है। बताया जाता है कि लाइसेंस की अवधि खत्म होने के बाद उन्होंने अपना हथियार पुलिस के पास जमा कर दिया था। शस्त्र अधिनियम की धाराओं के तहत कोई भी लाइसेंसधारी व्यक्ति अधिकतम 50 कारतूस ही अपने पास रख सकता है। इन कारतूसों के खर्च हो जाने की स्थिति में वह एक साल में अधिकतम 150 कारतूस ही खरीद सकता है। इस तरह चार लाइसेंसों के एवज में उनके पास अधिकतम 200 कारतूस ही होने चाहिए थे। जबकि पुलिस को उनके घर से 400 कारतूस मिले।

इससे भी गंभीर बात एसआइटी को यह लग रही है कि सिंह के पास से कुछ ऐसे भी कारतूस मिले हैं, जिनके लाइसेंस भी उनके पास नहीं हैं। उनके पास से मिले 0.765 बोर और 0.30 बोर के कारतूस ऐसे ही हथियारों के हैं। पुलिस अब उनसे जानना चाहती है कि उन्हें ये कारतूस कैसे मिले। बांबे हाई कोर्ट के आदेश पर मुंबई के पुलिस आयुक्त अरूप पटनायक के नेतृत्व में एसआइटी का गठन किया गया है, जो सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच कर रहा है।

मुंबई: मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को कांग्रेस के पूर्व नगर प्रमुख कृपाशंकर सिंह के परिसरों पर छापे मारे। कृपाशंकर पर बेनामी संपत्ति जमा करने का आरोप है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘उपनगरीय मुंबई में कृपाशंकर के घर और कार्यालय पर छापे मारे गए। हम जांच में काम आ सकने वाले कागजात खोज रहे हैं।’’

मुंबई कांग्रेस के पूर्व प्रमुख कृपाशंकर पर धोखाधड़ी के आरोप हैं। आय से अधिक संपत्ति के मामले में दो दिन पूर्व नगर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद कृपाशंकर ने उच्च न्यायालय के उनके खिलाफ मुकदमा चलाने और उनकी अचल संपत्ति को कुर्क करने के आदेश के खिलाफ गुरुवार को उच्चतम न्यायालय की शरण ली। उच्च न्यायालय ने 22 फरवरी को कृपाशंकर के खिलाफ प्रथम दृष्टया आपराधिक कदाचार की बात स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया था।

मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह और न्यायमूर्ति रौशन दलवी की खंड पीठ ने कहा, ‘‘पुलिस उपायुक्त अरूप पटनायक सरकार से कृपाशंकर सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत आपराधिक कदाचार के लिए मुकदमा चलाने की अनुमति लें। अन्य प्रतिवादियों (कृपाशंकर का परिवार) की भूमिका की भी जांच की जाएगी।’’

पीठ ने कहा था कि पटनायक कृपाशंकर और उसके परिवार, जिनमें उसकी पत्नी, पुत्र और पुत्रवधू शामिल हैं, की तमाम चल और अचल संपति के संबंध में दस्तावेजी सबूत जमा करें। कथित अपराध में सहायता देने के लिए परिजन पर भी मुकदमा चलाया जाएगा। अदालत ने कहा, ‘‘उन्होंने 1970 के दशक में साधारण रूप से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। 1998 में विधायक बनने तक उन्होंने खास कुछ नहीं कमाया था।’’

अदालत ने कहा, ‘‘उनका कहना है कि विधायक के तौर पर उन्हें 45 हजार रुपये हर महीने मिले और उन्होंने उस वेतन से एक दर्जन से ज्यादा अचल संपत्तियां अर्जित कर लीं। उनकी संपत्ति आय के ज्ञात स्रोत से कहीं ज्यादा है और यह गणना हमारे हिसाब से ही नहीं, बल्कि हमारे विवेक के भी खिलाफ है।’’

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