Monday , April 22 2019 [ 9:52 AM ]
Breaking News
Home / अन्य / तीन तलाक़ के बहाने,भाजपा हमारे घरों में घुसने की कोशिश कर रही-महबूबा मुफ्ती
तीन तलाक़ के बहाने,भाजपा हमारे घरों में घुसने की कोशिश कर रही-महबूबा मुफ्ती        624x330

तीन तलाक़ के बहाने,भाजपा हमारे घरों में घुसने की कोशिश कर रही-महबूबा मुफ्ती

राज्यसभा में पेश नहीं हो सका बिल,बिल के मुताबिक, मुकदमे का फैसला होने तक बच्चा मां के संरक्षण में ही रहेगा। आरोपी को उसका भी गुजारा देना होगा। तीन तलाक का अपराध सिर्फ तभी संज्ञेय होगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएं।

नई दिल्ली. राज्यसभा में हंगामा की वजह से तीन तलाक से जुड़ा नया विधेयक सोमवार को सदन में पेश नहीं हो सका। सदन की कार्यवाही 2 जनवरी तक स्थगित कर दी गई। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल तीन तलाक बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजे जाने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले भाजपा और कांग्रेस ने व्हिप जारी कर अपने सांसदों से सदन में मौजूद रहने को कहा था। तीन तलाक से जुड़ा यह बिल लोकसभा से पारित हो चुका है।

इस बीच, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि वे (भाजपा‌) हमारे घरों में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। इससे हमारी जिदंगी और परिवार अस्तव्यस्त हो जाएगा। इससे महिलाएं और पुरुषों को लिए आर्थिक रूप से ज्यादा परेशानी होगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पहले ही अपना रुख साफ कर चुकी है। उधर, बीजेडी सांसद पी आचार्य ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ हैं। इस बिल को सदन में पास होना चाहिए। हालांकि, कुछ हिस्से को हटाया जाना चाहिए।

तीन तलाक़ के बहाने,भाजपा हमारे घरों में घुसने की कोशिश कर रही-महबूबा मुफ्ती

रविशंकर ने कहा- हमारे पास पर्याप्त संख्याबल 

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक पेश करेंगे। उन्होंने दावा किया है कि बिल को राज्यसभा में पर्याप्त समर्थन मिलेगा। राज्यसभा में मोदी सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है। इस बिल को पारित कराना सरकार के लिए चुनौती है। इससे पहले दिसंबर 2017 में भी तीन तलाक विधेयक लोकसभा से पारित हुआ था, लेकिन राज्यसभा में यह अटक गया था।

बिल को रोकने के लिए अन्य दलों के साथ- कांग्रेस

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि इस बिल को रोकने के लिए पार्टी अन्य दलों के साथ रहेगी। उन्होंने बताया कि जब मुस्लिम महिला विधेयक को लोकसभा में पेश किया गया था, तब 10 पार्टियों ने इसका खुले तौर पर विरोध जताया था। वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार का कई मुद्दों पर साथ दे चुकी एआईएडीएमके भी इस बिल पर सरकार का विरोध कर रही है।

लोकसभा में बिल के पक्ष में 245 वोट पड़े थे

लोकसभा में गुरुवार को विधेयक के पक्ष में 245 और विरोध में 11 वोट पड़े थे। वोटिंग के दौरान कांग्रेस, अन्नाद्रमुक, द्रमुक और सपा के सदस्यों ने वॉकआउट किया था। सरकार शीतकालीन सत्र में ही इसे राज्यसभा से भी पारित कराना चाहती है। इसी साल सितंबर में तीन तलाक पर अध्यादेश जारी किया गया था।

राज्यसभा से विधेयक पास नहीं हुआ तो सरकार को फिर अध्यादेश लाना पड़ेगा
सरकार ने तीन तलाक को अपराध करार देने के लिए सितंबर में अध्यादेश जारी किया था। इसकी अवधि 6 महीने की होती है। अगर इस दरमियान संसद सत्र आ जाए तो सत्र शुरू होने से 42 दिन के भीतर अध्यादेश को बिल से रिप्लेस करना होता है। मौजूदा संसद सत्र 8 जनवरी तक चलेगा। अगर इस बार भी बिल राज्यसभा में अटक जाता है तो सरकार काे दोबारा अध्यादेश लाना पड़ेगा।

राज्यसभा के मौजूदा सांसद –  244

पार्टीसांसद
भाजपा73
जेडीयू6
अकाली दल3
शिवसेना3
एनडीए में शामिल अन्य पार्टियों के सदस्य3
नामांकित और निर्दलीय(जो साथ आ सकते हैं)9
भाजपा के पास समर्थन98


                   
सरकार के खिलाफ दल और उनके सदस्य

कांग्रेस50आरजेडी 5
टीएमसी13बसपा4
एआईडीएमके13डीएमके4
सपा13बीजेडी9
वामदलों के सदस्य7आप3
टीडीपी6पीडीपी2
टीआरएस6 
कुल135

16 महीने पहले आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

  • अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की 1400 साल पुरानी प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था और सरकार से कानून बनाने को कहा था।
  • सरकार ने दिसंबर 2017 में लोकसभा से मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक पारित कराया लेकिन राज्यसभा में यह बिल अटक गया, जहां सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है।
  • विपक्ष ने मांग की थी कि तीन तलाक के आरोपी के लिए जमानत का प्रावधान भी हो। 
  • इसी साल अगस्त में विधेयक में संशोधन किए गए, लेकिन यह फिर राज्यसभा में अटक गया।
  • इसके बाद सरकार सितंबर में अध्यादेश लेकर आई। इसमें विपक्ष की मांग काे ध्यान में रखते हुए जमानत का प्रावधान जोड़ा गया। अध्यादेश में कहा गया कि तीन तलाक देने पर तीन साल की जेल होगी।  

 
बिल में ये बदलाव हुए

  • अध्यादेश के आधार पर तैयार किए गए नए बिल के मुताबिक, आरोपी को पुलिस जमानत नहीं दे सकेगी। मजिस्ट्रेट पीड़ित पत्नी का पक्ष सुनने के बाद वाजिब वजहों के आधार पर जमानत दे सकते हैं। उन्हें पति-पत्नी के बीच सुलह कराकर शादी बरकरार रखने का भी अधिकार होगा।
  • बिल के मुताबिक, मुकदमे का फैसला होने तक बच्चा मां के संरक्षण में ही रहेगा। आरोपी को उसका भी गुजारा देना होगा। तीन तलाक का अपराध सिर्फ तभी संज्ञेय होगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएं।

About Arun Kumar Singh

Check Also

लोकतंत्र के महापर्व यानि लोकसभा चुनाव 2019: दूसरे फेज की वोटिंग में करीब 66 फीसदी वोट पड़े Capture 14 298x165

लोकतंत्र के महापर्व यानि लोकसभा चुनाव 2019: दूसरे फेज की वोटिंग में करीब 66 फीसदी वोट पड़े

लोकतंत्र के महापर्व यानि लोकसभा चुनाव के लिए 18 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान …

Leave a Reply

Copyright © 2017, All Right Reversed.