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दुर्दांत अपराधी मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या ….पढ़े स्पेशल रिपोर्ट

   मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। रंगदारी मांगने के आरोप में सोमवार को मुन्ना की बागपत कोर्ट में पेशी होनी थी लेकिन बागपत जेल में उसकी हत्या कर दी गई। शुरूआती जांच के मुताबिक मुन्ना बजरंगी को 10 गोलियां मारी गईं थी। वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल को अभी पुलिस ने बरामद नहीं किया है। 

    

   [object object] दुर्दांत अपराधी मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या ….पढ़े स्पेशल रिपोर्ट IMG 20180709 WA0330 300x234लखनऊ/जौनपुर (अरुण कुमार सिंह )   यूपी के कुख्यात माफिया डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या कर दी गई है. पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत कोर्ट में मुन्ना बजरंगी की पेशी होनी थी. उसको रविवार झांसी से बागपत लाया गया था. इसी दौरान जेल में उसकी हत्या कर दी गई. पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है.

 [object object] दुर्दांत अपराधी मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या ….पढ़े स्पेशल रिपोर्ट Screenshot 2018 07 09 12 42 41 020 com आपको बता दें कि मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह ने 10 दिन पहले ही प्रेस वार्ता कर बजरंगी की हत्या    की आशंका जताई थी_ 

 
    सीमा ने कहा था कि झांसी जेल में बंद माफिया मुन्ना बजरंगी का एनकाउंटर करने का षंड्यंत्र रचा जा रहा है। एसटीएफ में तैनात एक अधिकारी के इशारे पर ऐसा हो रहा है। इस अफसर के कहने पर ही जेल में बजरंगी को खाने में जहर देने की कोशिश तक की गई। इसके अलावा उन्होंने ढाई साल पहले विकासनगर में पुष्पजीत सिंह व गोमतीनगर में हुए तारिक हत्याकांड में शामिल शूटरों को सत्ता व पुलिस अधिकारियों का संरक्षण मिलने का आरोप भी मढ़ा था।
   

    प्रमुख सचिव गृह ने इस हत्याकांड की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस को शक है कि इसके पीछे डॉन बृजेश सिंह का हाथ हो सकता है जो इस समय वाराणसी की जेल में बंद है, लेकिन वह जेल से ही अपना सम्राज्य चला रहा है। बृजेश सिंह के भाई सुशील सिंह इस समय विधायक हैं जिन्हें वाई ग्रेड की सुरक्षा प्रदान की गई है।

     सुशील ने दावा किया था कि मुन्ना बजरंगी और उसका बॉस मुख्तार अंसारी उसकी हत्या कर सकता है। 90 के दौर में बृजेश सिंह दाऊद इब्राहिम के लिए काम करता था। दाऊद की बहन हसीना पारकर के पति की मौत के बाद बृजेश सिंह को गाविल के आदमी को मारने का कॉन्ट्रेक्ट दिया गया था। 2008 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बृजेश सिंह को ओडिशा से गिरफ्तार किया था।

   मुन्ना बजरंगी का इतिहास 
        मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है. उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था. उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे. मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया. उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी. इसके बाद जुर्म की दुनिया में कदम रख दिया.

   उसे जौनपुर के दबंग गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया. इसी दौरान 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी. इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया. 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया था.

  मुख्तार अंसारी का गैंग मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था. मुख्तार ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा. साल 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए. इसके बाद इस गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई. मुन्ना सीधे पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था. मुख्तार का खास आदमी बन गया.

  पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था. लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे. उन पर मुख्तार के दुश्मन ब्रिजेश सिंह का हाथ था. उसी के संरक्षण में कृष्णानंद राय का गैंग फल फूल रहा था. इसी वजह से दोनों गैंग अपनी ताकत बढ़ा रहे थे.

  इनके संबंध अंडरवर्ल्ड के साथ भी जुड़े गए थे. कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था. उन्होंने कृष्णानंद को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना को सौंप दी. मुख्तार से फरमान मिल जाने के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची. 29 नवंबर 2005 को कृष्णानंद की हत्या कर दी.

   उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे. वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था. उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले यूपी में दर्ज हैं. 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था. ऐसा माना जाता है कि एनकाउंटर के डर से उसने खुद गिरफ्तारी करवाई थी.

    
     जौनपुर- मुन्ना को हथियार रखने का बड़ा शौक था. वह फिल्मों की तरह एक बड़ा गैंगेस्टर बनना चाहता था. यही वजह थी कि 17 साल की नाबालिग उम्र में ही उसके खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया. जौनपुर के सुरेरी थाना में उसके खिलाफ मारपीट और अवैध असलहा रखने का मामला दर्ज किया गया था।  इसके बाद मुन्ना ने कभी पलटकर नहीं देखा। वह जरायम के दलदल में धंसता चला गया।
 
*अस्सी के दशक में की थी पहली हत्या*
 
     मुन्ना अपराध की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश में लगा था. इसी दौरान उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हो गया। मुन्ना अब उसके लिए काम करने लगा था।  इसी दौरान 1984 में मुन्ना ने लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। उसके मुंह खून लग चुका था।  इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना दम दिखाया।  उसके बाद उसने कई लोगों की जान ली।
 
पूर्वांचल में अपनी साख बढ़ाने के लिए मुन्ना बजरंगी 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली माफिया और राजनेता मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया। यह गैंग मऊ से संचालित हो रहा था, लेकिन इसका असर पूरे पूर्वांचल पर था। मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुए। इसके बाद इस गैंग की ताकत बहुत बढ़ गई। मुन्ना सीधे  सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था. वह लगातार मुख्तार अंसारी के निर्देशन में काम कर रहा था.
 
ठेकेदारी और दबंगई ने बढ़ाए दुश्मन
 
पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था. लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे। कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था। उन्होंने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंप दी।
 
मुन्ना ने की थी भाजपा विधायक की हत्या*
 
मुख्तार से फरमान मिल जाने के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची. और उसी के चलते 29 नवंबर 2005 को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय को दिन दहाड़े मौत की नींद सुला दिया. उसने अपने साथियों के साथ मिलकर  कृष्णानंद राय की दो गाड़ियों पर AK47 से 400 गोलियां बरसाई थी. इस हमले में गाजीपुर से विधायक कृष्णानंद राय के अलावा उनके साथ चल रहे 6 अन्य लोग भी मारे गए थे. पोस्टमार्टम के दौरान हर मृतक के शरीर से 60 से 100 तक गोलियां बरामद हुईं थी. इस हत्याकांड ने सूबे के सियासी हलकों में हलचल मचा दी. हर कोई मुन्ना बजरंगी के नाम से खौफ खाने लगा. इस हत्या को अंजाम देने के बाद वह मोस्ट वॉन्टेड बन गया था.
मुंबई में ली थी पनाह*
 
   यूपी पुलिस और एसटीएफ लगातार मुन्ना बजरंगी को तलाश कर रही थी. उसका यूपी और बिहार में रह पाना मुश्किल हो गया था. दिल्ली भी उसके लिए सुरक्षित नहीं था. इसलिए मुन्ना भागकर मुंबई चला गया. उसने एक लंबा अरसा वहीं गुजारा. इस दौरान उसका कई बार विदेश जाना भी होता रहा. उसके अंडरवर्ल्ड के लोगों से रिश्ते भी मजबूत होते जा रहे थे. वह मुंबई से ही फोन पर अपने लोगों को दिशा निर्देश दे रहा था.
 
राजनीति में आजमाई किस्मत*
 
सूत्रों की माने तो एक बार मुन्ना ने लोकसभा चुनाव में गाजीपुर लोकसभा सीट पर अपना एक डमी उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश की. मुन्ना बजरंगी एक महिला को गाजीपुर से भाजपा का टिकट दिलवाने की कोशिश कर रहा था. जिसके चलते उसके मुख्तार अंसारी के साथ संबंध भी खराब हो रहे थे. यही वजह थी कि मुख्तार उसके लोगों की मदद भी नहीं कर रहे थे. बीजेपी से निराश होने के बाद मुन्ना बजरंगी ने कांग्रेस का दामन थामा. वह कांग्रेस के एक कद्दावर नेता की शरण में चला गया. कांग्रेस के वह नेता भी जौनपुर जिले के रहने वाले थे. मगर मुंबई में रह कर सियासत करते थे. मुन्ना बजरंगी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में नेता जी को सपोर्ट भी किया था.
 
ऐसे गिरफ्तार हुआ था मुन्ना*
 
   उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना बजरंगी के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे. वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था. उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हैं. लेकिन 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था. माना जाता है कि मुन्ना को अपने एनकाउंटर का डर सता रहा था.
    इसलिए उसने खुद एक योजना के तहत दिल्ली पुलिस से अपनी गिरफ्तारी कराई थी. मुन्ना की गिरफ्तारी के इस ऑपरेशन में मुंबई पुलिस को भी ऐन वक्त पर शामिल किया गया था. बाद में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि दिल्ली के विवादास्पद एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह की हत्या में मुन्ना बजरंगी का हाथ होने का शक है. इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया. तब से उसे अलग अलग जेल में रखा जा रहा है. इस दौरान उसके जेल से लोगों को धमकाने, वसूली करने जैसे मामले भी सामने आते रहे हैं. मुन्ना बजरंगी का दावा है कि उसने अपने 20 साल के आपराधिक जीवन में 40 हत्याएं की थी।

    आज बागपत जेल मेँ पूर्वी उ.प्र.के कुख्यात माफिया ,पेशेवर हत्यारे,फिरौती अपहरणकर्ता प्रेम प्रकश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की गोली मार कर हत्या करने की सूचना मिली।वह कल ही एक मुकदमों मेँ सुनवाई हेतु झाँसी जेल से बागपत जेल लाये गये थे।यह हत्या बेहद सुनियोजित हत्या है जिसमेँ जेल विभाग की सँलिप्तता,लापरवाही  व प्रमाद अवश्य है अन्यथा यह हत्या न होती।यह खूँखार अपराधियोंके गैँगवार का दुष्परिणाम  हैँ किसी साधारण अपराधीके वश की नहीं है।
       इस घटना ने जेल व्यवस्था को कठघरे मेँ नँगा कर दिया है।जेल मेँ  हजारों मुलजिम व मुजरिम रखे जाते हैँ,इसमेँ बड़े छोटे अपराधी,जनसेवक,देशद्रोही सभी है।कुछ आपसी प्रतिद्वँदिता मेँ निर्दोष भी रहते हैं।इस घटना से ‘ सभी की आँखोँकी नीद गायब हो जायेगी।उन्हें प्रतिपल जीवनभय बना रहेगा।’ना जाने किस भेष मेँ हत्यारा मिल जाय’।इस प्रकरण की गहराई से जाँच कर जेल की कमियोँ को दूर किया जाय व जेल की काली भेड़ोँ को ढूढ़ कर उनका सफाया किया जाय ,अन्यथा ऐसी घटनाओंमेँ अप्रत्याशित बृद्धि होगी व सरकार की साख भी  खत्म होगी।
        सोशल मीडिया मेँ इस हत्या पर प्रतिक्रिया आरही है।कयी मुन्ना को जातीय गौरव बता रहे हैं।मुन्ना मुख्तार अँसारी गैग का सक्रिय सदस्य था। मुन्ना पर पचासोँ मुकदमेँ थे जिनमें अधिकाँश हत्या ,अपहरण के थे।ऐसे पेशेवर अपराधी को भी यदि सम्मानित नजरोँ से देखा गया तो फिर समाज का तो बुरा हाल तो  होगा ही।मुन्ना क्षत्रिय था और क्षात्र धर्म मेँ देश व समाज की रक्षा का व्रत लिया जाना चाहिए किसीकी हत्या अपहरण का नहीं।आज समाज मेँ समाज सेवी,इमानदार,विद्वान की सेवा के स्थान पर माफिया,अपरीधी का सम्मान होरहा है।हर धर्मं,जाति मेँ गुँडे मवाली  ही पूजे जा रहे है।मैँने महाकवि भूषण जी की एक कविता पढ़ी थी  कि–
    “शिवा क़ो सराहौ कि सराहौ छत्रसाल को।’
   आज का कवि लिखेगा कि-
       “मुन्ना को सराहूँ कि सराहूँ मुख्तार को।”
    आज भ्रष्ट नेता,अधिकारी तो समाज मेँ प्रतिष्ठा तो पा ही रहे हैं कुख्यात अपराधियोंका भी महिमा मँडन करेगे तो आने वाली सँताने तो वैसी आयेगीं ही।अभी देशद्रोहियों के साथी सँजयदत्त के पाप हीरानी ने फिल्म बनाकर धोने का प्रयास किया है,भविष्यमेँ ऐसे अपराधियोँ को राबिनहुड बता कर फिल्में भी बनेगी तो आश्चर्य नहीं। 
            जरा सोचिये।

 

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