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क्या वाकई यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हनुमान जी दलित है ??

हनुमान जी की जाति पर विवाद हो गया। हो भी क्यों न, भारत विवादों का देश जो है। विवादों के बल पर जीना ही भारतीय लोकतंत्र का चरित्र है। 
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      बजरंग बली की जाति को लेकर सोचता हूँ तो लगता है कि वे ब्राह्मण थे। “अष्ट सिद्धि और नौ निधियों” के ज्ञाता हनुमान से बड़ा ब्राह्मण और कौन होगा? ब्राह्मण होने की सबसे बड़ी कसौटी ब्रह्म को जानने की ही है न? हनुमान से अधिक कौन जान पाया ब्रह्म को? क्या धरती पर ऐसा कोई है जो हनुमान से बड़ा
अरुण कुमार सिंह(संपादक)                ब्राह्मण होने का दावा कर सके? सुग्रीव से अधिक शक्तिशाली होने के बाद भी उनको राजा बना कर स्वयं उनका मार्गदर्शन करते रहे हनुमान… यही है न ब्राह्मण का कर्म! फिर तो हनुमान जी ब्राह्मण हुए।
         पर तनिक सोचिये तो! हनुमान से बड़ा क्षत्रिय कौन होगा? तात्कालिक विश्व के सबसे शक्तिशाली शासक रावण के घर में अकेले घुस कर उसकी लंका जला देने वाले बजरंग बली से बड़ा योद्धा दूसरा कौन हुआ इस सृष्टि में? हनुमान जी रामायण युद्ध के एकमात्र योद्धा हैं जिन्हें कोई राक्षस कभी मूर्छित तक नहीं कर सका। वे रावण के घर मे अकेले घुस कर उसके बेटे को मारते हैं, वे अहिरावण-महिरावण के घर मे अकेले घुस कर उन्हें मारते हैं। क्षत्रित्व इसी निडरता का नाम है न? फिर उनसे बड़ा क्षत्रिय कौन होगा? हनुमान जी तो क्षत्रिय हुए।

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अरे रुकिए! परिस्थितियों के मारे दो योद्धाओं राम और सुग्रीव के मध्य सन्धि कराने वाले हनुमान में वणिक बुद्धि कम थी क्या? विश्व के ज्ञात इतिहास की पहली राजनैतिक सन्धि थी यह, जिसके तहत राम सुग्रीव को बाली से मुक्ति दिलाते हैं, और फिर सुग्रीव रावण-युद्ध मे राम का सहयोग करते हैं। फिर यदि मैं हनुमान जी को इस सृष्टि का सबसे सफल वैश्य मानूँ तो अनुचित होगा क्या? बिल्कुल नहीं होगा…
          अच्छा शूद्र का शाब्दिक अर्थ क्या होता है, जानते हैं? शूद्र शब्द का शाब्दिक अर्थ है सेवक। जिसके अंदर भी सेवा-भावना है वह शूद्र है। फिर जीवन भर स्वयं को प्रभु श्रीराम का दास कहने वाले हनुमान शूद्र नहीं हैं क्या? अपने स्वामी का उनसे अच्छा सेवक और कोई दिखता है क्या सम्पूर्ण जगत में?
          अच्छा बनवासी कौन कहलाता है? वही न, जिसका जन्म वन में हुआ हो? जिसका बचपन वन में बीता हो? जो वनों में रहता हो? हनुमान जी भी तो वनों में ही पले-बढ़े, वे बनवासी ही तो थे।
           मित्र! हनुमान जी को हमारे पूर्वजों ने यूँ ही देवता नहीं माना था। ब्राह्मण, वैश्य, शुद्र, क्षत्रिय, बनवासी, राजा, रंक, जितने भी सामाजिक वर्ग हैं न, सबके मूल संस्कार हनुमान जी में मिल जाएंगे आपको। हमने उन्हें कलियुग का जागृत देव इसीलिए माना है क्योंकि वे कलियुग के हर वर्ग विभाजन की रेखा को मिटा देते हैं। कलियुगी शक्तियां सनातन को तोड़ने के लिए चाहे जितने भी सामाजिक वर्ग तैयार कर दें, हनुमान जी हर वर्ग में फिट बैठेंगे।
            एक बात और कहूँ? हनुमान के बनवासी होने के सत्य से सबसे अधिक पीड़ा और खुजली किसे होती है, जानते हैं? हनुमान जी से सबसे अधिक डरते हैं जंगलों में बनवासियों का धर्मपरिवर्तन कराने वाले ईसाई मिशनरी। पिछले सौ वर्षों से बनवासियों को फुसलाने का उनका धंधा इसी आधार पर तो चल रहा है कि हिंदुओं के सारे देवता सवर्णों में से हैं। पिछले आठ सौ वर्षों से सनातन का ध्वज थामने वाले नाथपन्थ का एक सन्यासी आज जब सनातन के कलियुग में सबसे पूज्य देवता को बनवासी स्वाभिमान के साथ जोड़ता है, तो ईसाई मिशनरियां और उनके दलाल मीडियाकर्मियों का बिदकना स्वाभाविक ही है। सारे विवाद के पीछे बस इतनी सी ही बात है। नहीं तो जब देश मे राम को क्षत्रिय कहे जाने या कृष्ण को यादव कहे जाने से किसी को कोई आपत्ति नहीं, तो फिर हनुमान को बनवासी कहने पर विवाद क्यों हो रहा है? यहाँ तो भगवान विश्वकर्मा और महर्षि वाल्मीकि भी एक-एक जातियों के प्रतीक बन चुके हैं। फिर हनुमान जी पर विवाद क्यों?
          आपको पता है मिशनरी केरल और तमिलनाडु में मुरुगन के नाम से पूज्य भगवान कार्तिकेय को कई वर्षों से क्राइस्ट बता कर लोगों को फुसला रहे हैं? केरल के हिंदुओं के घर जा कर उन्हें बताया जा रहा है कि मुरुगन भगवान शिव के पुत्र नहीं, यीशु थे। आपको पता है कि दक्षिण के कई मंदिरों को हड़पने का लिए ईसाई मिशनरियां उन्हें अपना बता कर उनमें यीशु की लाश वाली मूर्ति टांगने का प्रयास कर चुकी हैं? आपको पता है कि हजारों की संख्या में ईसाई कई मंदिरों में ऐसे आक्रमण कर चुके हैं? हनुमान जी को बनवासी स्वाभिमान से जोड़ना उन सभी धार्मिक आक्रमणकारियों को बुरा लगा है, वे विवाद तो खड़ा कराएंगे ही।
सनातन धर्म विरोधी समाचार संस्थाये और कुछ राष्ट्र विरोधी ताकते सत्ता प्राप्त के लिए  समाज में भ्रम फैला रही है कि हिन्दू हृदय सम्राट “योगी आदित्यनाथ” जी ने भगवान हनुमान जी को दलित जाती का कहा !*
    क्या वाकई यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हनुमान जी दलित है ?? yogiji 300x188क्या वाकई यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हनुमान जी दलित है ?? yogiji 300x188दरअसल योगी जी कल राजस्थान की एक वनवासी (आदिवासी) बाहुल्य सीट पे भाजपा का चुनाव प्रचार कर रहे थे …. योगी जी ने सभा में उपस्तिथ स्रोता गणों को “बजरंगी संकल्प” देते हुए कहे कि 
हनुमान जी वनवासियों के देव है …. 
गिरवासी के देव है …. 
दलितों के शोषितों के वंचितों के देव है ….
पूर्व से लेकर पशिम तक और उत्तर से लेकर दक्षिण तक बजरंग बली जी ने ही सबको जोड़ रखा है ।
#अर्थात योगी जी ने संक्षेप में कहा कि बजरंग बली समूचे भारत के देव हैं । अशहाय, धनवान, उच्च,निम्न सभी वर्गों के देव बजरंग बली हैं ।*
#अब इसमें हनुमान जी की जाती का उल्लेख कहाँ हुआ ??*
मूल प्रश्न अब भी ये है कि *वनवासी कौन है ??*
#गिरवासी कौन है ??*
#दलित शोषित वंचित कौन है ??*
वनवासी या आदिवासी वो जो वन में रहे, जंगल में रहे, जीवनयापन के लिए कन्द मूल फल फूल मांस पे निर्भर रहे। राजस्थान में 100 के करीब ज्यादा जनजातियां वनवासी या आदिवासी सूची में लिस्टेड है। सरकारी नौकरियों और कट ऑफ लिस्ट में इनको विशेष छूट (लाभ) प्रदान की गई है।
विधानसभा चुनावों में इन जनजातियों के उम्मीदवारों का विशेष कोटा है। मोची, ढोली, नट, नायक, बावरी, मीणा जनजाति के उम्मीदवार तो चुनावों में भाजपा कांग्रेस निर्दलीय ताल भी ठोक रहे है।
संविधान प्रदत्त शब्द है एस. टी. (शेड्यूल ट्राइबल)
#गिरवासी कौन है ??*
#पर्वतों, पहाड़ों, पठारों पे रहने वाले गिरवासी है।*
#अब दलित शोषित वंचित कौन है ??* 
#दलित कौन है ???*
#दलित का अभिप्रायः-*
जो दबा हुआ है कुचला हुआ है वो दलित और दबा कुचला वर्ग समाज की किसी भी जाति में हो सकता है। गरीब ब्राह्मण, बणिया, क्षत्रिय, जाट, गुर्ज्जर, मीणा भी समाज के अन्य वर्गों द्वारा दबे-कुचले हो सकते हैं !
#वंचित कौन है ???*
#वंचित का अभिप्रायः-* 
जिसे जीवन यापन की मूलभूत सुविधाएं प्राप्त नहीं है- वो वंचित ।अब ये कहाँ लिखा है कि जीवन यापन की मूलभूत सुविधाओं से वंचित सिर्फ एस. सी. / एस. टी. वर्ग के लोग ही है।
गरीब ब्राह्मण, गरीब बणिया, गरीब क्षत्रिय, गरीब मीणा, गरीब जाट, गरीब गुर्ज्जर भी वंचित श्रेणी में आते हैं ।
#शोषित कौन है ??*
#शोषित का अभिप्राय:-* जो किसी भी प्रकार के शोषण का शिकार है, वो शोषित।
शोषण कई प्रकार के होते हैं ।
अतः योगी जी के अनुसार सभी शोषित वर्गों के देव भी बजरंग बली हैं ।
#निष्कर्ष:-* योगी जी की लक्ष्य पवित्र है । उन्होंने “बजरंगी संकल्प” देते हुए सभी वर्गों को जोड़ते हुए अखण्ड भारत निर्माण करने की प्रयास किए ।
#प्रश्न:-* *योगी जी के इतने महान व पवित्र  विचार को विदेशी समाचार संस्थाए एव कुछ देशद्रोही ताकते तोड़ मरोड़ कर क्यों प्रस्तुत कर रही है ?*
#किसके कहने पर  ऐसा कर रही है ?*
#आप लोग हल्के में न लें, ये विदेशी संस्था पहले भी हमारे देश में जातिवाद की आग लगा चुकी है !*
#इनकी  सक्रियता अर्थात क्या भविष्य में कोई बहुत बड़ी अनहोनी होने का संकेत है ?*
     हनुमान जी हमारे लिए कलियुग के सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं। वे ब्राह्मण, क्षत्रिय, बनवासी, वैश्य सब हैं। वे इन वर्गों में हो कर भी इनसे ऊपर हैं। उनके बनवासी होने के सत्य को न कोई ईसाई मिशनरी झुठला सकता है, न उनके उत्कोच पर पलने वाले कथित बुद्धिजीवी।
क्रूर धार्मिक आक्रमणकारियों के विरुद्ध मैं नाथपन्थ के इस महत्वपूर्ण प्रयास को नमन करता हूँ।

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