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मधुमेह!जानलेवा भी हो सकता है sugar

मधुमेह!जानलेवा भी हो सकता है

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Dr.Jhansee Mishra
Assistant Professor
V.B.S.P.University,Jaunpur,U.P

Achived “young Scientist Award” In Netherland
Achived “Atal Samman” award2018

मधुमेह का रोग इस रोग को आज की इंग्लिश भाषा में ‘डाइबिटिज’ के नाम से जाना जाता है| इस रोग को पुराने ज़माने में महुमेह कहा जाता था ये रोग ऐसा होता है की कई दिनों तक इसके होने का पता ही नहीं चलता है|

मधुमेह आजकल के सर्वाधिक प्रचलित रोगों में से एक है । बहुत से लोग इसे आधुनिक सभ्यता का अभिशाप कहते हैं।मधुमेह का रोग उन लोगों को ज्यादा होता है जो
लोग हमेशा बैठे रहते है| और कोई भी शारीरिक काम नहीं करते इससे शरीर में इन्सुलिन की कमी हो जाती है और इसे लोग जब खाना खाते है और खाने से साथ शक्कर भी लेते है|ये पूरी तरह से पच नहीं पाती और पेशाब के रूप में बहार निकल जाती है|

इस कारण इन्सुलिन की कमी हो जाती है पूरे विश्व में मधुमेह का फैलाव बढ़ रहा है। आज विश्व के 3 प्रतिशत से 12 प्रतिशत लोग या तो मधुमेह सी पीड़ित हैं अथवा उनके मधुमेह से पीड़ित हैं अथवा उनके मधुमेह से पीड़ित होने की संभवना है। “विश्व स्वास्थय संगठन” की एक सर्वे रिपोर्ट के अनुसार “ सन 2025 तक भारत दुनिया का डायबिटीक कैपिटल हो जाएगा।

ऐसा देखा गया है कि मधुमेह से पीड़ित वयस्क प्राय: 45 वर्ष से 55 वर्ष तक की आयु के मध्य के होते हैं। मधुमेह से ग्रस्त
युवाओं में प्राय: वंशानुगत कमजोरी होती है तथा कई बार तो यह कमजोरी अत्यधिक गंभीर हो जाती है।
मधुमेह के कारण
तेजी से बढते शहरीकरण, आधुनिक युग की समस्‍याऍं व तनाव, अचानक खानपान व रहन-सहन में आये परिवर्तन एवं पाश्‍त्‍यकरण (फास्‍ट फूड, कोकाकोला इंजेक्‍शन) प्रचुर मात्रा में भोजन की उपलब्‍धता व शारीरिक श्रम की कमी के कारण  मधुमेह हमारे देश में आजकल तेजी से बढ रहा है। मधुमेह के लिए उत्तरदायी अन्य कारणों में व्यायाम के अभाव एवं खान-पान में बदलाव के कारण तेजी से बढ़ता मोटापा, त्वरित गति से होता शहरीकरण, बढती सुविधाओं के कारण
व्ययाम की कमी, परिष्कृत, गरिष्ट एवं तामसिक आहार, फ़ास्ट फ़ूड का अधिक प्रयोग तथा तनावपूर्ण जीवनचर्या आदि प्रमुख हैं ।

किसी व्यक्ति में लगातार रहने वाला भावनात्मक तनाव रक्त प्रवाह में हर्मोस की क्रमशः वृद्धि करता रहता है जो अंतत: रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा कर मधुमेह का कारण बनता है । 2009 में जर्नल ऑफ़ अमरीकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “मानव शरीर में फ़ैट की मात्रा मापने वाली मेडिकल तकनीक ने साबित किया है कि स्वस्थ्य शरीर द्रव्यमान
सूचकांक वाले यूरोपीय लोगों में अंगों और कमर के आसपास कम फ़ैट होता है, जबकि एशियाई लोगों में यह ज़्यादा होता है. इससेख़तरा बढ़ जाता है.”
मधुमेह के लक्षण
मधुमेह या शूगर रोग में रक्‍त में ग्‍लूकोस सामान्‍य से अधिक हो जाता है और ग्‍लूकोस के अलावा वसा एवं प्रोटीन्‍स के उपापचन भी प्रभावित होते हैं ये रोग किसी भी उम्र में हो सकता है भारत में 95 प्रतिशत से ज्‍यादारोगी वयस्‍क है।लक्षण बार-बार मूत्रत्याग की इच्छा का प्रकट होना है । अन्य लक्षणों में अत्यधिक प्यास लगना (रोगी का मुख सूख जाता है तथा वह अपर्याप्त पानी की शिकायत करता है ) भूख, वजन कम होना, जल्दी थक जाना, चोट एवं घाव का धीरे-धीरे भरना, नेत्रज्योति में परिर्वतन,शरीर के कुछ स्थानों पर तीव्र खुजली, उँगलियों एवं पैर के अंगूठे में दर्द तथा दुर्बलता एवं उनींदापन आदि मुख्य हैं ।

इसके अतिरिक्त मधुमेह के और भी अनेक लक्षण हैं जैसे- पीठ का तिरछापन ,टांगों में भारीपन ,सुन्न और सूजे हुए पैर ,अत्यधिक प्यास ,कमर में कड़ापन ,नपुंसकता ,बीच बीच में अपच की शिकायत ,उत्तेजक पदार्थों,को खाने की इच्छा ,मूँहमें शुष्कता ,गुर्दों में पीड़ा का अनुभव,क्षय रोग का बुखार ,उदासीनता ,निराशापूर्ण मानसिक स्थिति ,मौन विषाद ,दुर्बलता
,मोटापा ऐसे लोगों में जिन्हें मधुमेह नहीं है प्रात: खाली पेट रक्त शर्करा का स्तर ( रात भर उपवास करने के पश्चात् ) 90 मि.ग्रा./डीएल. तथा भोजन के पश्चात् 145 मि. ग्रा./डीएल. होना चाहिए। अनियंत्रित मधुमेह की स्थिति में यह 500 मि. ग्रा./डीएल.या इससे भी अधिक हो सकता है।
मधुमेह का उपचार
मधुमेह की चिकित्सा का पहला लक्ष्य रक्त में शर्करा के स्तर को यथासम्भव समान्या या उसके आस-पास बनाए रखना है ।
दूसरा लक्ष्य मधुमेह की जटिलताओं को कम करना या उनसे यथासंभव बचना है । इस दुसरे लक्ष्य की प्राप्ति पहले लक्ष्य की प्राप्ति पर ही निर्भर करती है ।आज मधुमेह के लिए अनेक तरह के उपचार उपलब्ध हैं । तरह- तरह की दवाओं एवं अन्य तरीकों का इस्तेमाल मधुमेह की चिकित्सा के लिए किया जा रहा है । रोज इस दिशा में नवीन अनूसंधान हो रहे हैं । लेकिन प्राकृतिक
चिकित्सा के दृष्टिकोण से मधुमेह की पूर्णरूप से चिकित्सा करने के लिए यह आवश्यक है की हम पूरे शरीर को एक इकाई मानकर उसकी सर्वंगीण चिकित्सा पर अपना ध्यान केन्द्रित करें । ऐसा देखा गया है की मधुमेह के अधिकांश रोगियों में अग्नाशय के साथ-साथ यकृत भी प्रभावित रहता है । की बार गुर्दों की समस्या भी इसके साथ जुड़ी हुई रहती है । इसलिए मधुमेह की चिकित्सा करते समय हमें पाचन संस्थान को मजबूत बनाने पर ध्यान देना चाहिए ताकि कब्ज एवं पेट संबंधी अन्य
विकार ठीक किए जा सकें । शरीर में स्थित ये सभी अंग-प्रत्यंग अग्नाशय को भली-भांति कार्य करने में सहायता पहुँचाते हैं ।
कहने का आशय यह है कि पूरा शरीर संतुलन की अवस्था में कार्य करना चाहिए । “रोज़-मर्रा की ज़िन्दगी में कम-से-कम 30 –40 मिनट व्यायाम करना आपके लिए महत्वपूर्ण है|” हलके व्यायाम जैसे योग करने से या रोज़ टहलने से ग्लूकोज़ लेवल पर
प्रभाव पड़ता है| नियमित समय पर शुगर का लेवल मांनीटर करना शुगर का घरेलू इलाज का एक और महत्वपूर्ण तरीका है|“अपना ब्लड-शुगर का लेवल मांनीटर करने से आप देख सकते हैं क्या खाने या न खाने से आपके ग्लूकोज़ लेवल पर असर पड़ रहा है|”मधुमेह पर क़ाबू रखने के लिए अपने डॉक्टर की सलाह से glucometer का इस्तेमाल करें| “दवाओं के बिना आहार पर
सख्त शासन रखना और भी ज़रूरी हो जाता है|”
शुगर का घरेलू इलाज करने का एक और तरीका है अपने आहार पर निगरानी रखना| इससे ग्लूकोज़ लेवल पर नियंत्रण में रहता है|अपने dietician से बात करें और उचित आहार चार्ट बनवाएं| शुगर का लेवल नियंत्रण में रखने के लिए यह आहार कम खाएं –
Processed या packaged खाने की चीज़ें जैसे चिप्स, बिस्कुट, नमकीन, आदि
 सॉफ्ट ड्रिंक्स
 कोरमा या ग्रेवी वाला माँसाहारी खाना
 स्टार्च-युक्त खाद्य पदार्थ जैसे मैदे की ब्रेड, पास्ता, चावल, और सूजी या मैदे से बनी हुई चीज़ें
इनके बदले में आटा, जई, जुआर या बाजरे से बने आहार खाएं, जिनसे आपका ग्लूकोज़ नियंत्रण में रहेगा और शरीर को फाइबरमिलेगा|हल्का-फुल्का खाने के लिए कटे हुए फल, छाछ, स्प्राउट (sprouts) या उबले हुए अंडे का सेवन करें| शुगर को नियंत्रण में
रखने के लिए दिन में खाना कम अंतराल में खाएं|

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