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विधानसभा में राजीव गांधी से भारत रत्न सम्मान वापस लेने के प्रस्ताव पर विवाद

नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा में राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने के कथित प्रस्ताव पर आम आदमी पार्टी में जमकर विवाद हो गया। इस प्रस्ताव को सोशल मीडिया पर फैलाने वाली अलका लांबा की पार्टी ने छुट्टी कर दी। उनसे विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा ले लिया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस मामले में सोमनाथ भारती को पार्टी के प्रवक्ता पद से हटा दिया गया है।

     भारती ने दावा किया था कि उन्होंने ही यह प्रस्ताव दिया था। हालांकि आप पार्टी ने कहा है कि मूल प्रस्ताव में राजीव गांधी से भारत रत्न वापस लेने की बात शामिल ही नहीं थी। इसे हाथ से जोड़ा गया। 

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विधायक अलका लाम्बा 

इस तरह का कोई प्रस्ताव सदन से पारित नहीं हुआ

  1. सदन में प्रस्ताव विधायक जरनैल सिंह ने रखा, जिसका विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल समेत मौजूद सभी सदस्यों ने खड़े होकर समर्थन किया और प्रस्ताव पारित हो गया। हालांकि इसे लेकर आप विधायक और प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि ये प्रस्ताव का हिस्सा नहीं था, विधायक ने अपनी राइटिंग में लिखा, जिसे इस तरह से पास नहीं माना जा सकता। यह व्यक्तिगत तौर पर पेश किया गया प्रस्ताव था, जिसपर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। 
  2. सिख दंगों को नरसंहार करार दियाप्रस्ताव में कहा गया कि दिल्ली सरकार को गृह मंत्रालय को कड़े शब्दों में लिखकर देना चाहिए कि राष्ट्रीय राजधानी के इतिहास के भयंकर जनसंहार के पीड़ितों के परिवार और उनके करीबी न्याय से वंचित हैं।
  3. सदन ने अरविंद केजरीवाल सरकार को निर्देश दिए कि वह गृह मंत्रालय से कहे कि भारत के घरेलू आपराधिक कानूनों में मानवता विरोधी अपराध और जनसंहार को शामिल करने के लिए सभी महत्वपूर्ण और जरूरी कदम उठाए जाएं। हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट ने सिख विरोधी दंगा मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को उम्रकैद का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। 
  4. इस पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कहा- “राजीव गांधी ने देश के लिए अपनी जान दी। आप का असली चेहरा सामने आ गया है। मैंने हमेशा माना है कि आप भाजपा की बी टीम है। आप ने गोवा, पंजाब, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़ में अपने उम्मीदवार उतारे ताकि भाजपा की मदद हो सके और कांग्रेस का वोट कटे।”
  5. हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने भी 17 दिसंबर को ट्वीट किया था- राजीव गांधी के सभी अलंकार वापिस ले लिए जाने चाहिए और उनके नाम से चल रही सभी योजनाओं तथा प्रकल्पों से राजीव गांधी का नाम मिटा देना चाहिए। जब तक उन सबको सजा न मिले जो इसमें शामिल थे या जिन्होंने इस नरसंहार का समर्थन किया चाहे फिर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हों जिन्होंने इस नरसंहार का यह कहकर समर्थन किया हो कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है, उन्हें भी मरणोपरांत सजा दी जानी चाहिए।
  6. 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने थे। 1991 में उन्हें देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया।

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