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लोकतांत्रिक राष्ट्र में गैर संवैधानिक मजहबी अदालतों के गठन पर विशेष

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       लोकतांत्रिक  देश में सभी नागरिक एक संविधान एवं समाजिक सूत्र से बंधे होते हैं और सबको बराबर का अधिकार मिला होता है।सभी धर्म मजहब सम्प्रदाय के लोगों को धर्मनिरपेक्ष देश में अपनी धार्मिक गतिविधियों को संचालित करने का हक होता है लेकिन धार्मिक गतिविधियां संचालित करने के …

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समाजवादी घमासान !चाचा भतीजे के बीच छिड़ी सियासी जंग पैतरे बदल रही है

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      चाचा भतीजे के बीच छिड़ी सियासी जंग पैतरे बदल रही है इसके बावजूद अखिलेश यादव को जैसे इस पैतरेबाजी की जरा भी परवाह नहीं है।उन्होंने कहा कि ज्यों ज्यों चुनाव नजदीक आयेगे त्यों त्यों तमाम चींजे देखने को मिलेगी इसके बावजूद साइकिल दौड़ती रहेगी।       …

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हर वर्ष विभाजन की टीसें छोड़ जाता है स्वतन्त्रता दिवस

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      मानचित्र में जो दिखता है नहीं देश भारत है। भू पर नहीं दिलों में ही अब शेष कहीं भारत है।         स्वामी विवेकानन्द ने कहा था- विस्तार चेतना का लक्षण है। आक्चन च्छों या मृत्यु का…तो क्या यह राष्ट्र अब असंदिग्ध शब्दों में – …

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भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के पितामह डॉ विक्रम साराभाई

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     जिस समय देश अंग्रेजों के चंगुल से स्वतन्त्र हुआ, तब भारत में विज्ञान सम्बन्धी शोध प्रायः नहीं होते थे। गुलामी के कारण लोगों के मानस में यह धारणा बनी हुई थी कि भारतीय लोग प्रतिभाशाली नहीं है। शोध करना या नयी खोज करना इंग्लैण्ड, अमरीका, रूस, जर्मनी, फ्रान्स …

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भारतीय स्वाधीनता संग्राम के क्रांतिकारियों के इतिहास में सबसे कम उम्र में फांसी चढ़ने वाले अमर बलिदानी खुदीराम बोस को नमन

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    खुदीराम बोस सबसे कम उम्र में बलिदान होने वाले एक युवा क्रन्तिकारी थे जिनकी शहादत ने सम्पूर्ण देश में क्रांति की लहर पैदा कर दी। खुदीराम बोस देश की आजादी के लिए मात्र 19 साल की उम्र में फांसी पर चढ़ गये। वह आज ही के दिन यानी …

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स्वामी विवेकानंद जागरण पुरोधा,क्रांतिकारी या एक सन्यासी?

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      जब वह अमेरिका में थे, उन्होंने ‘स्वाधीनता के युद्ध’ और गृहयुद्ध से संबंधित स्थानों की यात्रा की थी. वे जॉर्ज वाशिंगटन, जिन्होंने स्वाधीनता-संग्राम का नेतृत्व किया था और अब्राहम लिंकन, जिन्होंने अमेरिका से दास-प्रथा समाप्त की थी, की प्रशंसा करते थे और उनको वास्तविक कर्मयोगी मानते थे. …

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श्रावण मास में रुद्राभिषेक रूद्र अर्थात भुत भावन शिव का ! विशेष ….

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      जिस संस्कृति की कोख से मैंने जन्म लिया है वो सनातन (=eternal) है, विज्ञान को परम्पराओं का जामा इसलिए पहनाया गया है ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें   श्रावण मॉस पर शिव के जलाभिषेक पर विशेष    यहाँ दो …

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कोरेगावं का सच एवं जातिगत आरक्षण पर विशेष ..

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     अगर मकबूल फिदा हुसैन को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हिन्दू देवी देवताओं का नग्न चित्र बना सकता है तो आप भी अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करते हुए इतिहास की सच्चाई सामने क्यों नहीं ला सकते?        आज तक भारत के हजारों वर्षों …

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जब वीर क्रान्तिकारियो को फांसी देने के बाद जेल वार्डन फूट फूट कर रोया ……

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भगतसिंह की ज़िन्दगी के वे आख़िरी 12 घंटे      लाहौर सेन्ट्रल जेल में 23 मार्च, 1931 की शुरुआत किसी और दिन की तरह ही हुई थी. फ़र्क सिर्फ़ इतना-सा था कि सुबह-सुबह ज़ोर की आँधी आयी थी.   लेकिन जेल के क़ैदियों को थोड़ा अजीब-सा लगा जब चार बजे …

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एक ऐसी कवित्री जिसकी कविता आप बार -बार पढ़ना चाहेंगे—

एक ऐसी कवित्री जिसकी कविता आप बार -बार पढ़ना चाहेंगे— Screenshot 2018 07 13 17 13 37 190 com

पल्लवी मिश्रा एक ऐसी कवयित्री है जिसे एक बार पढ़ने के बाद आप बार-बार पढ़ना चाहेंगे!इसलिए हमने सोचा कि आप भी उनकी मर्मस्पर्शी कविताओं का आनंद उठाये!! मेरे जैसे लोग,ज्यों उठ आते हैंरिश्तों की जलती अँगीठी सेउफनते कनस्तरों को उतारे बिनाधधकती अँगीठी परउफनते कनस्तरउठाते हैं धुँआ और शोरऔर फिरबचती है …

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