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[object object] बहुत कठिन डगरः कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के लिए सरकार चलाना बड़ी चुनौती

बहुत कठिन डगरः कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के लिए सरकार चलाना बड़ी चुनौती

     कांग्रेस एवं जेडीएस की सरकार कर्नाटक में जल्द बन जाएगी। लेकिन चुनाव के बाद अचानक बने इस गठबंधन की सरकार की राह आसान नहीं होगी।

   [object object] बहुत कठिन डगरः कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस के लिए सरकार चलाना बड़ी चुनौती           300x166  कांग्रेस और जेडीएस ने विधानसभा चुनाव एक-दूसरे के खिलाफ लड़े हैं। दोनों ने अलग-अलग वायदे जनता से किए हैं। जैसा कि कांग्रेस ने कहा है कि वह बाहर से ही सरकार का समर्थन करेगी, ऐसे में उसके लिए दोतरफा चुनौती होगी। 

एक तरफ उसके ऊपर जेडीएस सरकार के कामकाज के भले-बुरे की नैतिक जिम्मेदारी होगी दूसरी तरफ वादे पूरे करने का दबाव भी पड़ेगा। क्योंकि उसके समर्थन से ही सरकार चल रही है। लेकिन बाहर से समर्थन देकर क्या वह अपने वायदे पूरे करा पाएगी ?

   कर्नाटक में तोड़फोड़ की जो अटकलें पिछले तीन-चार दिनों से चल रही थी, उनके आगे बंद होने की उम्मीद कम है। कांग्रेस-जेडीएस की साझा सरकार बन जाने के बावजूद तोड़फोड़ से इनकार नहीं किया जा सकता। 

दूसरे, खबरें यह भी हैं कि क्षेत्रीय राजनीति के कारण दोनों दलों में इस गठबंधन को लेकर कई विधायकों में सहमति नहीं है। ये नाराज विधायक भी खुद भी इन अपनी पार्टियों का दामन छोड़ सकते हैं। इससे संख्याबल की समस्या सरकार के समक्ष खड़ी हो सकती है। वैसे, प्रश्न यह भी है कि क्या भाजपा इस शिकस्त को चुपचाप सहन कर अब चुप होकर बैठ जाएगी।

पहले भी बन चुकी है गठबंधन की सरकार 
कांग्रेस और जेडीएस के बीच गठबंधन की सरकार पहले भी बन चुकी है। लेकिन वह ज्यादा समय तक नहीं चली। 2004 में जब दोनों दलों की सरकार बनी थी तो जेडीएस ने कई शर्तें जोड़ दी थी और कांग्रेस को अपनी पसंद का मुख्यमंत्री बनाने पर बाध्य कर दिया था। धरम सिंह तब मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन डेढ़ साल के बाद ही कुमारस्वामी अलग हो गए।

दो दिन में ही येदियुरप्पा का CM पद से इस्तीफा, जानें ऐसे और कितने हैं

     कुछ दिन बाद उन्होंने सत्ता की साझीदारी में भाजपा के समर्थन से अपनी सरकार बनाई और खुद मुख्यमंत्री बने। लेकिन अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद जब भाजपा की बारी आई तो वे सत्ता सौंपने से मुकर गए। तब राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया। पर कुछ दिन बाद ही वे भाजपा को समर्थन देने को तैयार हो गए। तब येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बने थे। प्रश्न यह भी उठता है कि क्या जेडीएस की फितरत अब बदल गई है?big-challenge-for-congress-jds-to-run-the-government-after-yeddyurappa-quits-before-floor-test-in-karnataka

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